बरेली: अलग-अलग मुद्दों पर सीएम के अलग-अलग अंदाज, कभी विपक्ष पर तंज कसे तो कभी किए सीधे वार
अनुपम सिंह, बरेली। मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ के भाषण का अंदाज शुक्रवार को कुछ बदला नजर आया। करीब 21 मिनट तक उन्होंने अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग अंदाज में लोगों को साधने की कोशिश की। कभी कांग्रेस और सपा पर तंज कसे तो कभी सीधा वार किया। फरीदपुर के लोगों से सुरक्षा-विकास और सुशासन के लिए भाजपा प्रत्याशी को वोट देने की अपील की।
फरीदपुर को पौराणिक और ऐतिहासिक भूमि बताकर मुख्यमंत्री ने प्रणाम करने के बाद सीधा कांग्रेस को निशाने पर लिया। कहा, उनकी सरकार में भूख से माैतें होती थी। नौजवान पलायन करते थे लेकिन अब कोई बीमार पड़ता है और आयुष्मान कार्ड न होने के कारण इलाज नहीं करा पाता तो सांसद-विधायक या पार्टी के पदाधिकारी के पत्र लिखते ही वह सीधे लखनऊ से जनधन खाते में इलाज के लिए पैसे भेज देते हैं। कांग्रेस, सपा, बसपा की सरकार में किसान आत्महत्या करते था, मगर अब केंद्र सरकार किसानों के खाते में सम्मान निधि भेजती है। यह बदलाव की बयार है।
मुख्यमंत्री ने जनता से सीधे बात करते हुए भाजपा और गैर दलों के बीच फर्क भी समझाया। कहा, आप लोगों ने कांग्रेस, सपा, बसपा के दौर को देखा है, भाजपा को भी देखा है। कांग्रेस की सरकार में त्योहारों पर रसोई गैस खत्म हो जाती थी तो सिलेंडर नहीं मिलता था। बोले, घर के लोग सिलेंडर भराने जाते थे तो पुलिस की लाठियां खानी पड़ती थी और किसी तरह से वहां से बचकर आ गए तो खाली सिलेंडर लाने पर घर में बेलन से मार पड़ती थी।
आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म के नाम पर आरक्षण भारत में नहीं दिया जा सकता। कोई ऐसा काम नहीं होना चाहिए जिससे देश का फिर विभाजन हो। कांग्रेस का काम ही है देश का बंटवारा करना। मत, जाति और मजहब के आधार पर बांट रहे हैं। इंडी गठबंधन को वोट देने का मतलब है कि आप पाप के द्वार खोल रहे हैं। जनता से पूछा, जो राम को लाएं हैं, उनको लाओगे न। जवाब मिला, हां।
अच्छे काम करने पर जनता सिंहासन देती है, गलत काम करो तो उखाड़ फेंकती है
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की पसंद की सरकार बनती है। यह वोटों की ताकत ही है कि गलत काम करने वालों को जनता सत्ता से उखाड़ फेंकती है और अच्छा काम करने पर सिंहासन पर बिठाने का काम करती है। सपा-बसपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बोले, ये लोग दोहरे चरित्र के हैं। चुनाव में माई-बाप बनाए हुए हैं, लेकिन बाद में पहचानेंगे नहीं। वह एक फिल्मी गाना है न, मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है। इन लोगों का भी यही हाल है।
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