मुरादाबाद: संदिग्ध परिस्थितियों में संत रामदास की मौत

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मुरादाबाद, अमृत विचार। संदिग्ध परिस्थितियों में संत रामदास की मौत के बाद हंगामा हो गया। उनका शव शनिवार की सुबह गलशहीद थाना क्षेत्र के बाल्मीकि बस्ती स्थित एक धार्मिक स्थल पर मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने के कारण विभिन्न हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी भड़क गए। शव लेकर जा रही एंबुलेंस …

मुरादाबाद, अमृत विचार। संदिग्ध परिस्थितियों में संत रामदास की मौत के बाद हंगामा हो गया। उनका शव शनिवार की सुबह गलशहीद थाना क्षेत्र के बाल्मीकि बस्ती स्थित एक धार्मिक स्थल पर मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने के कारण विभिन्न हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी भड़क गए। शव लेकर जा रही एंबुलेंस को पीलीकोठी चौराहे पर रोककर लोगों ने जाम लगा दिया।

वह संत के मोबाइल और नकदी गायब होने के कारण हत्या का आरोप लगा रहे थे। इस दौरान पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर अपनी भड़ास निकाली। हंगामे और जाम की सूचना मिलने पर पुलिस-प्रशासनिक अफसर मौके पर आ गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद अफसरों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर मामले को शांत कराया। इसके बाद सभी अंतिम संस्कार के लिए शव ब्रजघाट लेकर रवाना हो गए।

मूलत: कटघर थाना क्षेत्र के अमरोहा गेट में रहने वाले रामदास काफी समय पहले संत हो गए थे। इसके बाद वह नागफनी थाना क्षेत्र में नवाबपुरा सैनी कालोनी स्थित मंदिर में रहने लगे थे। इसके अलावा वह मां गंगा प्रदूषण समिति के संरक्षक थे। संत बनने के बाद रामदास सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे थे। बताते हैं कि वह रोज शाम अपने अमरोहा गेट स्थित अपने जीजा निर्मल कुमार गुप्ता के यहां पर खाना खाने जाते थे।

शुक्रवार की शाम करीब सात बजे तक जब संत रामदास खाना खाने नहीं पहुंचे तो निर्मल कुमार ने उनको फोन किया लेकिन सभी नंबर बंद थे। निर्मल के अनुसार सुबह दो लोग उनके घर पहुंचे और बताया कि संत रामदास का शव गलशहीद थाना क्षेत्र के असालतपुरा स्थित बाल्मीकि मंदिर में मिला है। कुछ देर में उनकी मौत की सूचना शहरवासियों को हो गई। आनन-फानन में तमाम लोग मौके पर पहुंच गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पीएम को भेज दिया। आसपास के लोगों से पूछने पर मालूम हुआ कि रात को वह बदहवास हालत में मंदिर का पता पूछते हुए आए थे। बाद में वह जमीन में लेट गए। बाद में मोहल्ले वालों ने उनको ओढ़ने के लिए चादर दी। वहीं उनके तीन मोबाइल व नकदी गायब होने की सूचना लोगों को मिली तो वह हत्या का आरोप लगाने लगे।

एसपी सिटी अमित आनंद ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी, मोबाइल तलाश कर जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।

बिसरा सुरक्षित रखा
इधर पीएम हाउस पर भी विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों का जमावड़ा लगने लगा। पीएम के बाद जब मालूम हुआ कि मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है, लिहाजा बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है। यह जानकारी होने पर लोग भड़क गए। पीएम हाउस से शव लेकर निकले लोगों ने पीलीकोठी पर एंबुलेंस रुकवाकर जाम लगा दिया। उन्होंने हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। सूचना पर एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर, एडीएम सिटी राजेंद्र सिंह सेंगर व एसपी सिटी अमित आनंद भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। इस दौरान पदाधिकारियों की अफसरों से भी तीखी नोकझोंक हुई। अफसरों ने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद शांत हुए परिजन और विभिन्न संगठन के पदाधिकारी उनका शव लेकर ब्रजघाट रवाना हो गए।

खनन माफिया के निशाने पर थे  
मुरादाबाद। संत रामदास ने रामगंगा नदी को बचाने के लिए कई दफा आंदोलन किया। खासतौर पर उन्होंने खनन माफिया पर शिकंजा कसने की आवाज बुलंद की। यही वजह रही थी कि वह खनन माफियाओं के निशाने पर आ गए थे। इसके अलावा एक मंदिर को लेकर भी उनका कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। बताते हैं कि करीब तीन साल पहले संत रामदास ने तत्कालीन एक पार्षद पर जान से खतरा बताते हुए सिविल लाइंस कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। वहीं उन्होंने आला अफसरों को पत्र देकर सुरक्षा की भी मांग की थी।

 

 

 

 

 

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