शराब का सेवन ‘बायपोलर डिसऑर्डर’ से ग्रसित लोगों के मिज़ाज में बदलाव ला सकता है : अध्ययन
नई दिल्ली। शराब का सेवन ‘बायपोलर डिसऑर्डर’ से ग्रसित लोगों के मिज़ाज को अस्थिर और कार्यस्थल पर उनकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है। एक नये अध्ययन में यह पाया गया है। इस विकार से ग्रसित व्यक्ति के मिज़ाज, ऊर्जा और गतिविधि में असामान्य बदलाव देखने को मिलते हैं। साथ ही, उनमें कभी-कभी भ्रम की स्थिति भी पाई जाती है।
शोधार्थियों ने अपने अध्ययन में इस विकार से ग्रसित वयस्कों की मनोदशा और काम करने के तौर तरीके पर शराब के सेवन के दीर्घकालिक प्रभाव को समझने की कोशिश की। इनमें अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधार्थी भी शामिल थे। ये निष्कर्ष ‘द जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जेएएमए) नेटवर्क ओपन’ में प्रकाशित हुए हैं। अध्ययन में, शोधार्थियों ने इस विकार से पीड़ित 584 वयस्कों को शामिल किया।
शोध में शामिल लोगों की शराब की लत का आकलन ‘अल्कोहल यूज़ डिसऑर्डर आईडेंटिफिकेशन टेस्ट’ के जरिए किया गया। इसके तहत, ऐसे लोगों की जांच के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा मंजूरी प्राप्त प्रश्नावली होती है जिन्हें शराब का सेवन करने से परेशानी होती है या नुकसान होता है। शोधार्थियों ने पाया कि सामान्य मात्रा से अधिक शराब पीने से व्यक्ति अवसादग्रस्त हो जाता है और मिज़ाज एवं भावनाओं में बदलाव आता है। साथ ही, उनका कामकाज भी प्रभावित होता है।
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