नगर निगम: 45 करोड़ की आय बढ़ाने का इंतजाम, कर दाताओं की नहीं फिक्र
एआरबी के तहत मिलने वाली छूट भी भवनस्वामियों को नहीं मिल पा रही
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम ने जीआईएस सर्वे के दम पर गृहकर दाताओं की संख्या में वृद्धि कर 45 करोड़ रुपये आय बढ़ाने का पूरा इंतजाम कर लिया है, लेकिन हाउस टैक्स में नगर निगम की धारा 174- 2 के अनुसार एआरबी के तहत मिलने वाली छूट भवनस्वामियों को नहीं मिल पा रही है।
समस्या के समाधान के लिए वे नगर निगम कार्यालय और अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। कुछ पार्षदों का कहना है कि बिना बोर्ड में पास किए हाउस टैक्स बढ़ा दिया गया है। वे मुद्दे को बोर्ड बैठक में उठाएंगे।
31 मार्च से जून के पहले सप्ताह तक हाउस टैक्स जमा करने का काम बंद था, क्योंकि नया साफ्टवेयर अपडेट किया जा रहा था। जीआईएस सर्वे के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स बिल को रिवाइज किया गया है। नए सर्वे में 82,897 नए भवन टैक्स के दायरे में आए हैं। पहले कर दाताओं की संख्या 1.45 लाख थी, लेकिन अब 2.28 लाख हो गई है।
नगर निगम के कर विभाग को भरोसा है कि इसी साल अगर बिल सही से जमा हो गए तो 45 करोड़ या फिर उससे अधिक धनराशि बढ़ जाएगी, लेकिन लोग नए साफ्टवेयर के फेर में फंसकर परेशान हो रहे हैं।
सपा पार्षद राजेश अग्रवाल के अनुसार जीआईएस सर्वे एक कमरे में बैठ कर किया गया है। इसके कारण भवनस्वामी बढ़े टैक्स को लेकर दिक्कत में हैं। कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपने मकान में एक दुकान खोल रखी है लेकिन पूरे भवन पर कामर्शियल टैक्स लगा दिया गया है। लोगों की समस्या को लेकर अफसर गंभीर नहीं है। टैक्स बढ़ाना था तो बोर्ड बैठक में पास कराया जाना चाहिए था।
भाजपा पार्षद मुकेश सिंघल ने बताया कि नगर निगम की धारा के 174- 2 के अनुसार एआरबी के तहत मिलने वाली छूट भवनस्वामियों को नहीं मिल पा रही है। इसमें कई कैटेगरी हैं। 10 से 20 और 40 वर्ष पुराने भवनों के कर जमा करने पर छूट मिलती है, पर बिल में इसका उल्लेख ही नहीं है। इस वजह से भवन स्वामी निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
सपा पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना ने बताया कि नए साफ्टवेयर से लाेगों की समस्या बढ़ गई हैं। हाउस टैक्स में वृद्धि का मामला बोर्ड की बैठक में उठाया जाएगा। लोगों को चाहिए कि अधिक से अधिक आपत्तियों को दर्ज कराएं, जिसका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराया जाएगा।
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