Kanpur: सो रहा आरटीओ, ट्रैफिक नियम रौंद रहे ई-रिक्शे, बीच सड़क पर सवारी उतारते और बिठाते, फैलाते अराजकता
डेढ़ लाख से अधिक ई-रिक्शे बने मुसीबत, आरटीओ के रिकार्ड में मात्र 45 हजार दर
कानपुर, अमृत विचार। शहर के अंदर ई रिक्शों की भरमार हो गई है। पूरे शहर में दौड़ रहे करीब डेढ़ लाख ई रिक्शे शहर के लिए मुसीबत बन गए हैं। शहर में वास्तव में ई रिक्शों की संख्या कितनी है, ये रिकार्ड किसी के पास नहीं है, आरटीओ में भी इनकी संख्या 45 हजार ही दर्ज है। भारी अराजकता के बावजूद आरटीओ इन पर अंकुश नहीं लगाता।
दरअसल ई रिक्शों के पंजीयन से आरटीओ को भी राजस्व मिल रहा है, इसलिए इनपर कार्रवाई नहीं की जाती और जनता मुसीबत झेल रही है। सरकार की ओर से भी ईरिक्शों को हरी झंडी है क्योंकि इससे बेरोजगारों को रोजगार मिल रहा है। एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में शहर के अंदर डेढ़ लाख से ज्यादा ई रिक्शे हैं और इनकी संख्या में दिन-प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि 2025 तक शहर में ई रिक्शों की संख्या चार लाख तक पहुंच सकती है।
तीन दशक पूर्व टेंपो की अराजकता से पूरा शहर परेशान था, यही कारण है कि शहर को सीएनजी बसें सरकार ने उपलब्ध कराई थीं। अब ई रिक्शों की अराजकता के आगे टेंपो की अराजकता 10 प्रतिशत भी नहीं बची है। ई रिक्शा चलाते हुए कहीं न कहीं नाबालिग भी दिख जाएंगे। बेकनगंज, पानी की टंकी, रहमानी मार्टके, तलाक महल, दलेलपुरवा, बादशाही नाका, मूलगंज, मेस्टन रोड, परेड समेत दर्जनों ऐसे क्षेत्र हैं जहां ई रिक्शों की अराजकता के कारण लोग परेशान हैं। ई रिक्शे बीच सड़क पर ही सवारी उतारते और बिठाते हैं, चाहे जाम लगे तो इनकी बला से।
ई रिक्शों के कारण बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल रहा है, आरटीओ ऑफिस में करीब 45 हजार ई रिक्शे पंजीकृत हैं, धीरे धीरे सभी का पंजीयन किया जाएगा। -राजेश राजपूत, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
