हल्द्वानी: कठुआ आतंकी हमले की जिम्मेदारी 'KT'ने ली...देखिए Social Media में क्या लिखा...
हल्द्वानी, अमृत विचार। कठुआ में हुए आतंकी हमले में उत्तराखंड के 5 जवान शहीद हो गए जबकि पांच अन्य जवान घायल बताए जा रहे हैं। पूरे प्रदेश में पांच जवानों की शहादत को लेकर शोक की लहर है तो वहीं आतंकियों की इस करतूत को लेकर बेहद आक्रोश भी। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी KT यानी कश्मीर टाइगर्स नाम के आतंकी संगठन ने ली है। 
पूरा घटनाक्रम पर सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षाबल कठुआ से करीब 123 किलोमीटर दूर लोहाई मल्हार ब्लॉक के माछेड़ी इलाके के बडनोटा में दोपहर 3.30 बजे पहाड़ी इलाके में पेट्रोलिंग के लिए निकले थे। रास्ता कच्चा था, गाड़ी की रफ्तार भी धीमी थी। एक तरफ ऊंची पहाड़ी और दूसरी तरफ खाई थी।

आतंकियों ने पहले एक पहाड़ी से घात लगाकर सेना के ट्रक पर ग्रेनेड फेंका, फिर स्नाइपर्स ने फायरिंग की। सेना ने भी काउंटर फायरिंग की, लेकिन आतंकी जंगल में भाग गए। फिलहाल सेना, आतंकियों की तलाश में हेलिकॉप्टर, स्निफर डॉग्स, UAV की मदद ले रही है।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, हमले में 3 से 4 आतंकियों के शामिल होने की बात सामने आ रही है। वे एडवांस हथियारों से लैस हैं। ये आतंकी हाल ही में सीमा पार से घुसपैठ करके आए हैं। आतंकियों को हमले में एक लोकल गाइड ने भी मदद पहुंचाई।
सोशल मीडिया में कश्मीर टाइगर्स ने ये लिखा
हमले के बाद कश्मीर टाइगर्स ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने 26 जून को तीन आतंकवादियों की मौत का बदला ले लिया है।
बता दें कि 11 जून को देर रात आतंकवादियों ने डोडा जिले में सुरक्षाबलों पर हमला किया था, जिसमें पांच जवान जख्मी हो गए थे। इसके बाद सेना ने अभियान चलाकर तीन आतंकियों को मार गिराया था। सेना के अनुसार, कठुआ में सोमवार देर रात तक गोलीबारी जारी रही और घटनास्थल पर अतिरिक्त बल भेजा गया। इस अभियान में पैरा कमांडो के जवान शामिल होंगे।
सेना ने इस साल के अंत तक जम्मू रीजन से आतंक के सफाए का प्लान तैयार किया है। बीते दिनों गृह मंत्रालय में हुई बैठक के बाद पुंछ, राजौरी, रियासी, कठुआ में सक्रिय 30 आतंकियों की लिस्ट बनी है। तय हुआ है कि आतंकियों और इनके मददगारों के सफाए के लिए एनिमी एजेंट्स एक्ट अपने मूल रूप में फिर लागू किया जाएगा।
इस अधिनियम में मददगारों की संपत्ति जब्त करने से लेकर उम्र कैद और फांसी तक की सजा का प्रावधान है। इसे 1948 में विदेशी आतंकियों और घुसपैठियों के खात्मे के लिए बनाया गया था। बाद में इसे संशोधन कर कानूनी रूप दिया गया। सजा घटाकर 10 साल की गई। अभी UAPA भी लागू है, लेकिन एनिमी एक्ट इससे भी सख्त है।

