उत्तराखंड: छात्रवृत्ति घोटाले की जांच करेगी एसआईटी
नैनीताल। उत्तराखंड के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं और उच्च न्यायालय ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह घोटाले के सभी पहलुओं की जांच कर तीन महीने के अंदर प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ और न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की …
नैनीताल। उत्तराखंड के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं और उच्च न्यायालय ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह घोटाले के सभी पहलुओं की जांच कर तीन महीने के अंदर प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ और न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की अदालत ने याचिकाकर्ता रवीन्द्र जुगरान एवं अन्य की ओर से दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की सुनवाई के बाद ये निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से कहा गया कि छात्रवृत्ति घोटाले की 75 प्रतिशत जांच पूरी हो गई है और एसआईटी आगामी छह माह में शेष जांच पूरी कर देगी। इस मामले में नियुक्त विशेष वकील (स्पेशल काउंसिल) ललित सामंत ने बताया कि अंत में अदालत ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह घोटाले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करे और तीन सप्ताह के अंदर प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करे।
उन्होंने कहा कि एसआईटी को अब कालेजों में फर्जी प्रवेश के साथ साथ उन मामलों की जांच भी करनी होगी जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ आईएएस व पीसीएस अधिकारियों ने भी छात्रवृत्ति का लाभ अपने पालकों को दिया है। लगभग छह सौ करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में एसआईटी द्वारा की जा रही है।
देहरादून और हरिद्वार जनपद की जांच आईपीएस टीएस मंजूनाथ की अगुवाई वाली एर्सआटी को सौंपी गई है जबकि शेष 11 जिलों की जांच संजय गुंज्याल की अगुवाई वाली एसआईटी को सौंपी गई है। याचिकाकर्ता रवीन्द्र जुगरान और अन्य की ओर से वर्ष 2018 में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों के नाम पर मिलने वाली छात्रवृत्ति में वर्ष 2003 से गड़बड़ी की गई है और राज्य सरकार की ओर से इस मामले की जांच में लापरवाही की जा रही है।
