बरेली: त्योहारी सीजन में रोडवेज के दावे हवा-हवाई, बसों का इंतजार करते रहे यात्री
बरेली, अमृत विचार। त्योहारी सीजन में यात्रा को सुखद बनाने के रोडवेज के दावे हवा-हवाई साबित हुए। दिवाली के दिन यात्रियों को बसों के इंतजार में काफी समय गुजारना पड़ा। जिन बसों का संचालन हो रहा था। उसमें भी कदम रखने की जगह नहीं थी। वहीं, डग्गामार वाहन चालकों ने इसका जमकर फायदा उठाया। उन्होंने …
बरेली, अमृत विचार। त्योहारी सीजन में यात्रा को सुखद बनाने के रोडवेज के दावे हवा-हवाई साबित हुए। दिवाली के दिन यात्रियों को बसों के इंतजार में काफी समय गुजारना पड़ा। जिन बसों का संचालन हो रहा था। उसमें भी कदम रखने की जगह नहीं थी। वहीं, डग्गामार वाहन चालकों ने इसका जमकर फायदा उठाया। उन्होंने यात्रियों से मनमानी मोटी रकम भी वसूली।
लॉकडाउन की वजह से रोडवेज को अपनी कई बसों को सरेंडर करना पड़ा था। त्योहारी सीजन शुरू हुआ तो मुख्यालय के आदेश पर कई बसों को छुड़ाया गया, मगर अभी भी कुछ बसें सरेंडर हैं। बरेली डिपो में इस समय निगम की कुल 135 बसों का ही संचालन हो रहा है। वहीं, रुहेखंड डिपो में भी लगभग निगम की 115 बसे ही संचालित हो रही है। धनतेरस से ही बसों में भीड़भाड़ शुरू हो गई थी।
दिवाली आते-आते हालात ऐसे हो गए कि रोडवेज की बसों में कदम रखने के लिए भी जगह नहीं थी। सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर यात्रियों को घंटो बसों का इंतजार करना पड़ा। मजबूरी में यात्रियों ने डग्गामार वाहनों से ही यात्रा की। मगर डग्गामार वहान संचालकों ने इसका फायदा उठाते हुए किराए से अधिक रकम यात्रियों से वसूल की।
तीन दिनों में तीन करोड़ के पार पहुंची रोडवेज की वसूली
त्योहारी सीजन रोडवेज पर कोरोना बेअसर दिखाई दिया। महज तीन दिनों में रोडवेज की आय तीन करोड़ के पार पहुंच गई। धनतेरस से लेकर दिवाली तक रोडवेज ने करीब तीन करोड़ नौ लाख की आमदानी कर ली। अधिकारियों की माने तो रोडवेज बसों के सरेंडर होने की वजह से यह आए कम रह गई। यदि सभी बसों का संचालन होता तो आय दोगुना तक पहुंच सकती थी। हालांकि लाकडाउन को देखते हुए इस आय को भी अधिकारी ठीकठाक मान रहे है।
