बरेली: बारिश में भीग गया खुले में पड़ा सैकड़ों क्विंटल धान
बरेली, अमृत विचार। जिला प्रशासन की लापरवाही व केंद्र प्रभारियों की मनमानी से सोमवार रात हुई बारिश से केंद्रों के बाहर खुले में रखा सैकड़ों क्विंटल धान खतरे में पड़ गया। हालांकि बारिश के दौरान तिरपाल और पॉलीथिन से जैसे-तैसे ढंक कर कुछ धान को बचाने का प्रयास भी किया गया। अब भीगे धान के …
बरेली, अमृत विचार। जिला प्रशासन की लापरवाही व केंद्र प्रभारियों की मनमानी से सोमवार रात हुई बारिश से केंद्रों के बाहर खुले में रखा सैकड़ों क्विंटल धान खतरे में पड़ गया। हालांकि बारिश के दौरान तिरपाल और पॉलीथिन से जैसे-तैसे ढंक कर कुछ धान को बचाने का प्रयास भी किया गया। अब भीगे धान के खराब होने की संभावना बनी है। दूसरी तरफ केंद्रों से धान उठान की उचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से भी बड़ी मात्रा में धान केंद्रों पर रखा है।
जिले में एक अक्टूबर से शुरू हुई धान खरीद को लेकर अफसर शुरू से ही केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन धान तुलाई और परिवहन की विकराल हुई समस्या का सामधान नहीं करा पा रहे। यही कारण है केंद्रों पर हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे डंप पड़ा है। सोमवार रात हुई तेज बारिश के कारण सैंकड़ों क्विंटल धान भीगा तो अफसरों की चिंता बढ़ गई। रात में धान की पहरेदारी कर रहे किसानों ने तो तिरपाल आदि की व्यवस्था कर किसी तरह अपना धान भीगने से बचा लिया। लेकिन केंद्र प्रभारियों द्वारा खरीदा गया धान भीगने से वह नहीं बचा सके।
सर्वाधिक नुकसान नवाबगंज और बहेड़ी के क्रय केंद्रों पर रखे धान को पहुंचा है। इधर, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में खड़ी धान की फसल को इस बारिश से नुकसान होगा। जिले में धान का सीजन चल रहा है और गेहूं बिजाई पर किसान लगे हैं। बारिश ने एक दो दिन पहले गेहूं की गई बिजाई को नुकसान पहुंचाया है। इन किसानों को दोबारा से गेहूं बिजाई करनी पड़ेगी। किसानों का कहना है पहले भाव ने नुकसान पहुंचा और अब बारिश ने धान भिगोकर परेशानी बढ़ा दी है। अब धान सुखाने के बाद ही उसकी बिक्री होनी तय है। नवाबगंज, क्योलड़िया, बहेड़ी, आवंला की मंडियों में धान का उठान धीमी गति से होने पर अफसर भी हरकत में आ गए हैं। अगर और बारिश होती है तो धान को और नुकसान हो सकता है।
खुले में चल रही है खरीद
अफसरों की सुस्ती का आलम यह है कि अधिकांश केंद्र खुले में ही धान खरीद करते हैं। त्योहार के चलते तीन दिनों से खरीद बंद थी। मगर, धान लेकर पहुंचने वाले किसानों का केंद्रों पर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। बताया जाता है जिन किसानों का धान तुल चुका था। उसे तो सुरक्षित कर लिया गया था। लेकिन उन किसानों का धान भीग गया। जिनकी तोल नहीं हुई है। अब धान सूखने के बाद ही तोल हो सकेगी। इसके लिए किसानों को अब मौसम खुलने का इंतजार करना होगा।
धान को बचाने नहीं किए उपाय
सोमवार दोपहर से ही जिले में बारिश होने की खबरें आ रही थी, लेकिन समय रहते जिम्मेदारों ने सुध नहीं ली। किसानों का कहना है अफसरों ने देर शाम तक भी अगर थोड़ी बहुत गंभीरता दिखाई होती तो सैकड़ों क्विंटल धान भीगने से बच जाता। हालांकि विभाग के जिम्मेदारों का कहना है, क्रेंद्रों पर तिरपाल आदि की सभी व्यवस्थाए पूर्ण है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ केंद्रों पर धान भींगने की जानकारी मिली है।
खराब हो सकता है धान बोरियों में रखा धान यदि खोलकर सुखाया नहीं गया तो खराब हो जाएगा। इस स्थिति में धान अंकुरित हो सकता है। फफूंदी लग सकती है। जानकार बताते हैं भीगा धान समय पर नहीं सूखेगा तो उसका खराब होना स्वभाविक है। फिलहाल केंद्र प्रभारी तेजी से धान के उठान में जुटे हुए हैं। वहीं, ढेरियों में रखा धान किसान सुखाने में जुटे हैं। हालांकि दावा किया जा रहा है कि ढेरियों में लगे धान को सुखाने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
