Prayagraj : अंतर्जनपदीय स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों को सैनिकों के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता
अमृत विचार, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महिला शिक्षिका द्वारा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण की प्रार्थना लेकर दाखिल याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वैवाहिक कलह स्थानांतरण की मांग करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता है।
कोर्ट ने सैनिकों का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षकों को हमारे वर्दीधारी कर्मियों के प्रेरक जीवन और आचरण से प्रेरणा लेनी चाहिए। वे प्रतिकूल परिस्थितियों और दुर्गम इलाकों में भी सेवा करते रहते हैं। अगर हमारे वर्दीधारी कर्मी भी आरामदेह घरेलू पोस्टिंग के लिए होड़ लगाने लगें, तो देश की संप्रभुता की रक्षा कौन करेगा। शिक्षकों को हमारे सैनिकों से सीखना चाहिए कि वह कैसे अपना व्यक्तिगत आराम और कल्याण की संतुष्टि से पहले राष्ट्र की सेवा को प्राथमिकता देते हैं।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आजकल शिक्षकों की सर्वप्रमुख आकांक्षा उनकी पसंद के स्थान पर स्थानांतरण है और कहीं ना कहीं ज्ञान प्रदान करने और हमारे संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप युवा दिमागों को ढालने की महत्वाकांक्षा शिक्षकों की प्राथमिकता सूची में नीचे चली गई है। कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि शिक्षकों को भारतीय परंपरा में पूजनीय माना जाता है। किसी भी शिक्षक को अपनी पसंदीदा स्थान पर स्थानांतरण मांगने का अधिकार नहीं है। उन्हें अपने हितों की अपेक्षा छात्र और संस्थागत हितों को सर्वोपरि स्थान देना चाहिए।
उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकलपीठ ने शुभ्रा राय की याचिका को खारिज करते हुए की। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याची की वर्तमान संस्था में 103 छात्र हैं और शिक्षक केवल दो हैं और अगर याची का स्थानांतरण कर दिया जाता है तो इससे शिक्षकों की संख्या अपेक्षित मानक से कम हो जाएगी, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात बुरी तरह प्रभावित होगा। अतः याची को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन करने की स्वतंत्रता देते हुए नियोक्ता को छात्रों और संस्थागत हितों के प्रति सचेत करते हुए सरकारी नीति के अनुसार याची के अभ्यावेदन पर विचार करने को कहा।
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