Mahakumbh 2025: दहेजमुक्त विवाह की मिसाल बना महाकुंभ, पहली बार हुई कन्यादान की रस्में...एक दूजे के हुए 105 जोड़े
महाकुंभ नगर, अमृत विचार। संगम की रेती और गंगा की पावन धरा के बीच लहरों पर बहती वैदिक मंत्र की ध्वनि, यज्ञ की पावन अग्नि से उठती सुगंध और मंगलगीतों की मधुर स्वर लहरियां महाकुंभ के इस दिव्य क्षण में जैसे पूरी सृष्टि विवाह की इस पावन बेला की साक्षी बन गई हो। सजे-धजे मंडप में जब 105 नवयुगल वैवाहिक बंधन में बंधे, यह भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों का एक अद्भुत उत्सव था।
यह विवाह केवल दो आत्माओं का मिलन नहीं, बल्कि समाज में एक नई चेतना का जागरण भी था, जहां प्रेम, समर्पण और सादगी की लौ प्रज्वलित हो रही थी और दहेज जैसी कुरीतियों की अंधकारमयी छाया मिट रही थी। 144 वर्षों बाद महाकुंभ में आया यह शुभ संयोग मानो स्वयं कालचक्र ने समाज को एक नई दिशा देने के लिए रचा हो।
आध्यात्मिकता और सामाजिक सुधार का संगम बने महाकुंभ में सोमवार को ऐतिहासिक पहल देखने को मिली। देश के विभिन्न राज्यों से आए 105 वर-वधुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दहेजमुक्त विवाह की पवित्र रस्में निभाईं। कन्यादान की इस अनूठी परंपरा के हजारों श्रद्धालु, संत और समाजसेवी साक्षी बने। महाकुंभ के सेक्टर-8 में त्रिदंडी जीयर स्वामीजी महाराज के शिविर में यह भव्य विवाह समारोह आयोजित किया गया। जैसे ही पवित्र अग्नि के समक्ष 105 जोड़ों ने सात फेरे लिए, पूरे वातावरण में वैदिक मंत्रों की दिव्य गूंज सुनाई दी। विवाह के इस पावन क्षण में हजारों श्रद्धालु साक्षी बने और पूरे माहौल में मंगलगीतों की ध्वनि गूंज उठी।
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