हरिद्वार: हरकी पैड़ी में एस्केप चैनल का अध्यादेश निरस्त

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हरिद्वार, अमृत विचार। तीर्थनगरी हरिद्वार में हरकी पैड़ी, मायापुर और दक्ष मंदिर कनखल में बहने वाली मां गंगा अब गंगा ही कहलाएगी। भक्त भले ही इसे गंगा मैया कहते रहे, मगर पिछली कांग्रेस सरकार के एक अध्यादेश के बाद यहां से बहने वाली गंगा की जगह सरकारी भाषा में एस्केप चैनल हो गई थी। त्रिवेंद्र …

हरिद्वार, अमृत विचार। तीर्थनगरी हरिद्वार में हरकी पैड़ी, मायापुर और दक्ष मंदिर कनखल में बहने वाली मां गंगा अब गंगा ही कहलाएगी। भक्त भले ही इसे गंगा मैया कहते रहे, मगर पिछली कांग्रेस सरकार के एक अध्यादेश के बाद यहां से बहने वाली गंगा की जगह सरकारी भाषा में एस्केप चैनल हो गई थी। त्रिवेंद्र सरकार ने इस अध्यादेश को निरस्त करते हुए पुरानी सरकार का फैसला पलट दिया है।

हरिद्वार में गंगा के एस्केप चैनल को लेकर उत्तराखंड सरकार ने बहुत सोच विचार के बाद यह बड़ा फैसला लिया है। रविवार को अखाड़ा परिषद के संतों और गंगा सभा के पदाधिकारियों की मौजूदगी में सरकारी अधिकारियों की बैठक के बाद सरकार ने एस्केप चैनल के अध्यादेश को निरस्त करने के निर्देश दिए। गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ का दावा है कि आदेश सोमवार को जारी हो जाएगा। ऐसा होने के बाद सरकारी भाषा में भी हरकी पैड़ी से बहने वाली गंगा गंगा ही कहलाई जाने लगेगी। 

एस्केप चैनल संबंधी अध्यादेश उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत की सरकार में हुआ था। हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित पिछले लंबे समय से अध्यादेश को निरस्त करने की मांग कर रहे थे। तीर्थ पुरोहित गंगा के सम्मान के लिए पिछले 61 दिन से आंदोलन कर हरकी पैड़ी पर धरना दे रहे थे। हरीश रावत की सरकार ने 2016 में भागीरथी बिंदु, सर्वानंद घाट भूपतवाला से हरकी पैड़ी, मायापुर और दक्ष मंदिर कनखल तक बहने वाली गंगा को एस्केप चैनल घोषित कर दिया था।  इसका मतलब था कि यह धारा गंगा न होकर एक नहर है जो गंगा में अतिरिक्त पानी की निकासी के काम आती है। इसके बाद से ही तीर्थ पुरोहित इसका विरोध कर रहे थे। वहीं, कुछ महीने पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार जाकर इस अध्यादेश को लेकर अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने साधु संतों से लिखित में माफी भी मांगी थी। तब उन्होंने कहा था कि उनकी गलती को त्रिवेंद्र सरकार चाहे तो सुधार सकती है। 

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