हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- वैवाहिक विवाद के कारण बैंक नहीं कर सकता खाता फ्रीज, जानिये पूरा मामला
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद के कारण फ्रीज हुए कंपनी के बैंक खाते को पुनर्संचालित करने की अनुमति देते हुए कहा कि बैंक को इस तरह किसी कंपनी को उसके खाते से राशि निकालने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए पाया कि याची के बैंक खाते को फ्रीज करने के लिए किसी भी सक्षम न्यायालय द्वारा कोई आदेश पारित नहीं किया गया था और न ही किसी आपराधिक मामले में जांच अधिकारी द्वारा इस संबंध में कोई आदेश दिया गया था।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो बैंक को कंपनी के निदेशक के वैवाहिक विवाद के संबंध में निजी दावों पर निर्णय लेने का अधिकार देता हो। उक्त आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने प्रोव्यू कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के निदेशक राजीव कुमार अरोड़ा द्वारा दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया, जिसमें 28 मई 2024 के बैंक के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने बैंक के आदेश को रद्द करते हुए कंपनी को अपना खाता संचालित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया। मामले के अनुसार निदेशक की पत्नी ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर बैंक से गाजियाबाद शाखा में उनके खाते को फ्रीज करने का अनुरोध किया।
बता दें कि निदेशक के पास कंपनी में 41.15 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि उनकी पत्नी के पास 0.75 प्रतिशत शेयर हैं। अंत में कोर्ट ने बैंक की कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए निष्कर्ष निकाला कि बैंक केवल कानून द्वारा अनुमत अनिवार्यताओं के आधार पर ही राशि निकालने से मना कर सकता है, जबकि वर्तमान मामले में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं दिखती है, इसलिए याची के कंपनी के खिलाफ बैंक की वर्तमान कार्रवाई को बरकरार नहीं रखा जा सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने निदेशक की पत्नी को सक्षम अदालत या राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष अपनी शिकायत उठाने का अवसर खुला रखा।
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