लखनऊ: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
लखनऊ, अमृत विचार। केन्द्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की नीति के विरोध में देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने गुरूवार को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि केन्द्र और कुछ राज्य सरकारें बिजली वितरण का निजीकरण करने पर आमादा हैं। जिसके विरोध में देश भर …
लखनऊ, अमृत विचार। केन्द्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की नीति के विरोध में देश के 15 लाख बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने गुरूवार को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि केन्द्र और कुछ राज्य सरकारें बिजली वितरण का निजीकरण करने पर आमादा हैं। जिसके विरोध में देश भर के बिजली कर्मियों ने आज प्रदर्शन कर आक्रोश व्यक्त किया।
देश भर में लाखों बिजली कर्मियों ने विरोध सभाएं व् प्रदर्शन कर निजीकरण के उद्देश्य से लाये गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉकुमेंट को निरस्त करने की मॉंग की और चेतावनी दी कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह वापस न की गई तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। उन्होंने बताया कि बिजली कर्मियों ने उपभोक्ताओं खासकर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं से निजीकरण विरोधी आन्दोलन में सहयोग करने की अपील की और कहा कि निजीकरण के बाद सबसे अधिक नुक्सान आम उपभोक्ताओं का ही होने जा रहा है।
इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉकुमेंट के अनुसार लागत से कम मूल्य पर किसी को भी बिजली नहीं दी जाएगी और सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी। वर्तमान में बिजली की लागत लगभग 07.90 रूपये प्रति यूनिट है और कंपनी एक्ट के अनुसार निजी कंपनियों को कम से कम 16 फीसदी मुनाफा लेने का अधिकार होगा जिसका अर्थ यह हुआ कि 10 रुपये प्रति यूनिट से कम दाम पर किसी भी उपभोक्ता को बिजली नहीं मिलेगी।
नई नीति के अनुसार डिस्कॉम के 100 प्रतिशत शेयर बेंचे जाने है और सरकार का निजीकरण के बाद कर्मचारियों के प्रति कोई दायित्व नहीं रहेग। कर्मचारियों को निजी क्षेत्र के रहमोकरम पर छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगों में बिजली कंपनियों का एकीकरण कर केरल के केएसईबी लिमिटेड की तरह सभी प्रांतों में एसईबी लिमिटेड का पुनर्गठन किया जाये जिसमे उत्पादन , पारेषण और वितरण एक साथ हों , निजीकरण और फ्रेंचाइजी की सभी प्रक्रिया निरस्त की जाये और चल रहे निजीकरण व् फ्रेंचाइजी को रद्द किया जाये, सभी बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए तथा तेलंगाना सरकार की तरह बिजली सेक्टर में कार्यरत सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाये।
