प्रयागराज : प्रतिनियुक्त अधिकारी की मूल विभाग में निर्धारित अवधि से पहले वापसी संभव
प्रयागराज, अमृत विचार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारी को उसके मूल विभाग में कभी भी वापस बुलाया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारी का यह अधिकार नहीं है कि वह निर्धारित अवधि पूरी होने तक प्रतिनियुक्ति के विभाग में ही कार्यरत रहे। उक्त आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अमित कुमार गौतम की याचिका को खारिज करते हुए पारित किया।
याची ने तर्क दिया कि उन्हें राज्यपाल की ओर से तीन वर्ष के लिए उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड में प्रतिनियुक्त किया गया था, इसलिए उनकी वापसी का आदेश केवल राज्य सरकार ही पारित कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉर्पोरेशन अभी भी अधिकारियों की मांग कर रहा है और प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के पीछे छिपे आरोप हैं, जिससे आदेश दंडात्मक प्रतीत होता है।
दूसरी ओर कॉर्पोरेशन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यह स्थानांतरण स्वरूप प्रतिनियुक्ति है और याची का प्रतिनियुक्ति पर निर्धारित अवधि तक बने रहने का कोई अविच्छिन्न अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कॉर्पोरेशन एक स्वतंत्र संस्था है और उसके प्रबंध निदेशक को आदेश पारित करने का अधिकार है। विवादित आदेश न तो कलंकित है और न ही दंडात्मक। इसके अलावा कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि प्रतिनियुक्त अधिकारी को कभी भी वापस बुलाया जा सकता है। अंत में कोर्ट ने याची की सभी दलीलों को खारिज करते हुए उनके मूल विभाग में वापसी के आदेश को सही ठहराया।
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