बरेली: आसमान पर कोहरे की चादर, सड़क पर जानलेवा सफर
अमृत विचार, बरेली। सड़क हादसों को रोकने के लिए परिवहन आयुक्त ने सभी विभागों को जिम्मेदारी सौंपी है लेकिन जिम्मेदार खामोश बैठे हैं। बीते दो दिनों से आसमान से कोहरे की घनी सफेद चादर वाहनों के सामने आ रही है लेकिन हादसों को रोकने के लिए सड़क किनारे डाली जाने वाली सफेद पट्टी गायब है। …
अमृत विचार, बरेली। सड़क हादसों को रोकने के लिए परिवहन आयुक्त ने सभी विभागों को जिम्मेदारी सौंपी है लेकिन जिम्मेदार खामोश बैठे हैं। बीते दो दिनों से आसमान से कोहरे की घनी सफेद चादर वाहनों के सामने आ रही है लेकिन हादसों को रोकने के लिए सड़क किनारे डाली जाने वाली सफेद पट्टी गायब है। ऐसे में एक बार सड़क से वाहन फिसला तो किसी अन्य वाहन, वस्तु से टकराना या पलटना तय है। ये हादसे लोगों की जान भी ले सकते हैं। इसी तरह से हादसों को रोकने के लिए डिवाइडर बनाए जाते हैं लेकिन इन डिवाइडरों के बीच में बने अवैध कट से भी हादसे का खतरा बना रहता है। यदि जिम्मेदार इसी तरह से मुंह मोड़कर बैठे रहेंगे तो हादसों पर लगाम लगाने का अभियान बेकार जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों में बढ़ोतरी पर नाराजगी जताई थी। इसके तहत सभी राज्यों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत कुछ वर्षों के रिकार्ड का अध्ययन किया गया तो सामने आया था कि प्रदेश में बरेली, शाहजहांपुर समेत 15 जिलों में सबसे ज्यादा 33 फीसदी हादसे हुए हैं। यातायात माह के तहत हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान और सख्ती करने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत 10 फीसदी हादसों में मौतों को कम करने का लक्ष्य रखा गया था।
यातायात माह के बाद परिवहन आयुक्त ने एक आदेश जारी किया था। इसके तहत सभी विभागों की जिम्मेदारी तय की गई थी। इसमें सड़क निर्माण एजेंसी को एनएचएआई पर एडवांस लाइफ सेविंग एंबुलेंस की तैनाती के अलावा चिह्नित मार्गों पर विभिन्न प्रकार के संकेतक बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत तीव्र मोड़, गति सीमा, संकीर्ण पुल के बोर्ड लगाने हैं। इसके अलावा मानकों के अनुसार रोड की मार्किंग करनी है। डिवाइडर के अनधिकृत कट बंद करने हैं। दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में क्रैश बैरियर लगाने हैं। आवासीय मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था की जानी है। हाईवे पर अवैध तरीके से गाड़ियां न खड़ी हों। इसके अलावा ट्रैफिक व परिवहन विभाग को वाहनों के पीछे रिफ्लेक्टर लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सड़कों पर प्रकाश व्यवस्था नहीं
हादसों को रोकने के लिए जरूरी निर्देश तो दिए गए हैं लेकिन इनका पालन नहीं किया जा रहा है। सड़कों पर संकेतक नहीं लगे हैं। शहर में पीलीभीत रोड समेत कई स्थानों पर प्रकाश की व्यवस्था ही नहीं है। यही नहीं पीलीभीत रोड पर सफेद पट्टी नहीं लगी है। इसके अलावा रोड किनारे खड़ंजा भी नहीं डाला गया है। ऐसे में यदि कोई वाहन घने कोहरे की वजह से सड़क से नीचे गया तो हादसा तय है क्योंकि इस सड़क पर किनारे या तो खाई है या फिर अवैध कब्जे हैं। कहीं कोई वाहन खड़ा रहता है तो कहीं खोखा या फिर अन्य अवरोधक है। यही हाल मिनी बाईपास, इज्ज्तनगर का है। शहर के अंदर तो अधिकांश सड़कें उधड़ी पड़ी हैं।

डिवाइडर पर अवैध कट
शहर में सड़कों पर बिना रोक-टोक के वाहन गुजरें, इसके लिए डिवाइडर बनाए गए हैं लेकिन डिवाइडर पर इतने अधिक कट हैं कि इनकी वजह से हमेशा हादसा होने का डर रहता है। कई बार हादसे भी हो चुके हैं। पीलीभीत रोड पर सेटेलाइट से बैरियर टू तक 40 से अधिक कट हैं। कई साल पहले ट्रैफिक पुलिस ने 19 अनधिकृत कट बंद करने के लिए नगर निगम को रिपोर्ट भेजी थी लेकिन कट बंद नहीं हुए। इसी तरह से अयूब खां से चौकी चौराहा और खुर्रम गौटिया के पास भी कई कट हैं।
इन सड़कों पर भी अवैध कट बंद करने को लेकर कई बार ट्रैफिक पुलिस ने तैयारी की लेकिन कट बंद नहीं हुई। कुछ दिनों पहले ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट पर बटलर प्लाजा के सामने नगर निगम की टीम अनधिकृत कट बंद करने गई थी लेकिन व्यापारियों ने हंगामा कर टीम को लौटा दिया। इस कट की वजह से चौकी चौराहे पर जाम लगता है। कई कट तो डिवाइडरों पर रसूखदारों के लिए बनवाए गए हैं। इन्हें बंद ही नहीं किया जाता है। लोग कुछ दूर घूमकर नहीं जाना चाहते और फिर जगह-जगह कट होने से अचानक वाहन सामने आ जाता है और हादसा हो जाता है।
जेब्रा लाइन भी मिट चुकी
शहर में ट्रैफिक सिग्नल तो लगे हैं लेकिन चल नहीं रहे हैं। कोई निर्माण कार्य की वजह से बंद है तो कोई खराब पड़ा है। इसके अलावा चौराहों पर जेब्रा लाइन होनी चाहिए लेकिन शहर के अधिकांश चौराहों पर जेब्रा लाइन मिट गई है। इसकी वजह से लोग चौराहे पर पट्टी के आगे वाहन खड़ा कर लेते हैं और फिर रेड लाइट जंप करने की कोशिश करते हैं। जब दूसरी तरफ से सिग्नल चालू होने पर वाहन आते हैं तो हादसा होने का डर बना रहता है। इनकी वजह से जाम भी लग जाता है।
रिफ्लेक्टर नहीं लगे
यातायात माह के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने कुछ वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाए लेकिन बहुत से ऐसे वाहन हैं जिन पर टेप नहीं लगे हैं। कोहरे में जब कोई बैलगाड़ी, घोड़ागाड़ी, ट्रैक्टर-ट्राली या अन्य कोई वाहन जिसके पीछे रिफ्लेक्टर नहीं लगा होता है तो दूसरे वाहन चालक को यह दिखाई नहीं देते हैं। इसकी वजह से भी हादसा होता है। कोहरे के दौरान कई वाहन सड़क किनारे खड़े हो जाते हैं और उनकी फॉग लाइट या इंडीकेटर नहीं जलते हैं तो भी हादसे हो जाते हैं। इसके अलावा सड़कों पर भी रिफ्लेक्टर लगाए जाते हैं। कई जगह कट पर भी रिफ्लेक्टर लगे होते हैं जिससे पता चल जाता है कि यहां से कोई वाहन गुजर सकता है लेकिन अधिकांश जगह यह भी नहीं होते हैं जिससे हादसा होता है।
