तुम चाहो या न चाहो... कार्रवाई होगी, वाणिज्य कर विभाग में भ्रष्ट अफसरों पर लगातार कार्रवाई से मचा हड़कंप
ईमानदार व्यापारी खुलकर दे रहे सबूत, 15 दिन में 8 नपे, 12 अफसर घेरे में
लखनऊ, अमृत विचार: वाणिज्य कर निदेशालय के गलियारे में शुक्रवार को असामान्य सन्नाटा पसरा था। तुम चाहो या न चाहो... कार्रवाई होगी, आदेश ऊपर से है। यही एक लाइन भ्रष्ट अफसरों पर खौफ बन गई है। अबकी बार कोई चेतावनी नहीं, सीधे निलंबन का आदेश होना अप्रत्याशित रहा। जल्द ही व्यापारियों की ओर से दिए जा रहे ऑडियो-वीडियो साक्ष्य से 12 और अफसरों पर गाज गिरने वाली है।
ईमानदार व्यापारी को डरने की जरूरत नहीं, लेकिन अफसर अगर डराना चाहें तो खुद को तैयार रखें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बीते दिनों वाणिज्य कर विभाग की समीक्षा बैठक में दिया गया यह सख्त संदेश अब शासन में एक्शन का कोडवर्ड बन गया है। 15 दिनों में वाणिज्य कर विभाग के 8 अधिकारियों पर कार्रवाई और 10 मामलों में एफआईआर इसका सबूत हैं। गुरुवार को हुई कार्रवाई में अपर आयुक्त ग्रेड-दो (अपील) पंचम कानपुर अरुण शंकर राय और सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-एक रामपुर सतीश कुमार को अचानक फोन पर बुलावा आया, लेकिन अंदाजा उन्हें भी नहीं था कि अगला आदेश ''निलंबन'' होगा।
मुख्यमंत्री की दो टूक चेतावनी के बाद विभागीय ढांचे में बड़ा बदलाव शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि व्यापारियों के लिए अलग से शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन शुरू होगी, जहां हर शिकायत पर 48 घंटे में एक्शन होगा। साफ है, योगी सरकार व्यापारियों के पक्ष में खड़ी है, लेकिन अफसरशाही में ''छूट की दुकान'' बंद करना इतना आसान नहीं है। फिलहाल विभाग में ''गुप्त निगरानी सेल'' सक्रिय कर दिया गया है, जो सचल दलों के हर मूवमेंट को ट्रैक करेगा। अब बिना अनुमति कोई भी अफसर न तो छापा मारेगा, न ही जब्ती करेगा। दोषी पाए जाने पर अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जा रहा है और पेंशन कटौती जैसे कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। सचल दल पर अंकुश लगाने के लिए योजना बनाई गई है कि अब इनमें प्रतिनियुक्ति पर अन्य विभागों के अधिकारी भेजे जाएंगे।
सचल दल का होगा पुनर्गठन
वाणिज्य कर के प्रमुख सचिव एम. देवराज की अगुवाई में विभाग ने सचल दलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक जिन अफसरों पर भ्रष्टाचार, मनमानी और व्यापारियों से अवैध वसूली के आरोप सामने आए थे, उन्हें पद से हटाया गया है। नए अधिकारियों की तैनाती में ईमानदारी, दक्षता और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। हर जिले में व्यापारी संगठनों के साथ संवाद कार्यक्रम चलाने और उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए अलग सेल गठित हो रहा है।
विभाग की छवि सुधारना प्राथमिकता : प्रमुख सचिव
प्रमुख सचिव वाणिज्य कर एम. देवराज का कहना है कि हमारी प्राथमिकता है कि विभाग की छवि सुधरे और व्यापारी निडर होकर कारोबार करें। सचल दल में साफ रिकॉर्ड वाले अधिकारियों को ही जिम्मेदारी दी जाएगी। विभागीय कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए नई निगरानी प्रणाली तैयार की जा रही है। जीएसटी चेक पोस्ट, ई-वे बिल सत्यापन, और औचक निरीक्षण की व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा जा रहा है ताकि कोई अफसर नियमों से खिलवाड़ न कर सके।
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