बतकही

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Edited By Anjali Singh
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आज यदि कोई सबसे ज्यादा खुश है तो वह है कुमार साहब का बेटा रोहन। आखिर रोहन के चचेरे भाई की शादी जो है। शादी की जितनी भी जिम्मेदारी घर के सदस्यों की थी, उतनी ही जिम्मेदारी रोहन पर भी थी। रोहन को पहले दिन से ही उसके चाचा राजेश ने शादी का सारा तय कार्यक्रम कह सुनाया था ताकि रोहन को किसी भी कार्य के करने में कोई परेशानी न हो। रोहन भी पूरी जिम्मेदारी के साथ हर कार्य को पूरी तरह निभाने में मशगूल था। 

फिर चाहे वह कार्य अतिथि सत्कार का हो या शादी की अन्य रस्मों का हो। सभी रोहन के कार्यों से बहुत खुश थे। देखते ही देखते शाम को बारात जाने का समय हो गया। रोहन जल्दी तैयार हुआ और अपने ताया के लड़के योगेश के साथ अलग गाड़ी पर बारात के साथ चल पड़ा। बीच रास्ते में योगेश ने गाड़ी को कहीं ओर घुमा दिया और थोड़ी देर गाड़ी रोकने के बाद वह दुकान से शराब की बोतल ले आया। 

रोहन ने शराब पीने से इनकार किया और बोला कि चाचा जी ने मुझे बहुत काम सौंपे हैं मुझे उन्हें पूरा करना है, यह काम नहीं करना है, लेकिन योगेश कहां मानने वाला था। उसने रोहन को भी शराब पिलाई और खुद भी शराब का खूब सेवन किया। दोनों ने अपने पिता को फोन करके बता दिया कि वे सुबह मिलेंगे और किसी दोस्त के घर चले गए हैं। उन दोनों ने इतनी शराब पी कि कुछ भी होश न रहा। वे दोनों शादी की रस्में तक नहीं देख सके। 

उधर रोहन के पिता समझ चुके थे कि असली माजरा क्या है? लेकिन शादी के बीच में उन्होंने माहौल को संभाले रखा। और तो और रोहन को सुझाए गए सारे काम, रोहन के पिता ने ही किए। अगले दिन वधु प्रवेश के आयोजन समारोह पर रोहन घर आ पहुंचा। रोहन के बाल बिखरे थे और कपड़े भी गंदे हो चुके थे। यह देखकर रोहन के पिता से रहा नहीं गया और उन्होंने सबके सामने रोहन की खूब पिटाई की। 

एक मामूली शराब पीने के कारण रोहन ने शादी का सारा मजा किरकिरा कर दिया। रोहन, जो पहले पूरी जिम्मेदारी के साथ शादी के हर कार्य करने में मशगूल था, एक शराब ने उसका खूब मजाक बनाया। रोहन की तरह ऐसे कई लोग हैं, जो किसी भी समारोह का आनंद तो उठाना चाहते हैं, लेकिन शराब पीने की लत उन्हें सब कुछ भुला देती है। उन्हें यह ज्ञात नहीं रहता कि समारोह की स्मृतियां कितनी महत्वपूर्ण होती हैं, जो असल आनंद देती हैं। स्वयं को भी और परिवार को भी। -शिवालिक अवस्थी, लेखक