ऑनलाइन गेमिंग पर सख्ती...कंपनियों से मांगा जाएगा डाटा , लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए साइबर क्राइम सेल करेगी कार्रवाई
लखनऊ, अमृत विचार: ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी कई घटनाओं ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। जांच में पता चला कि कई देशों में प्रतिबंधित गेम नियमों का उल्लंघन करते हुए भारत में संचालित हो रहे हैं। इन गेमों से जुड़े लोगों पर निगरानी बढ़ाने के लिए पुलिस अब विशेष तैयारी कर रही है। जेसीपी कानून-व्यवस्था बबलू कुमार ने बताया कि कंपनियों से पत्राचार कर गेम संचालकों का डाटा जुटाया जाएगा। इसके जरिए उन लोगों की पहचान की जाएगी जो रुपये लगाकर गेम खेल रहे हैं। प्रारंभिक तौर पर 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर फोकस किया जाएगा।
लोकप्रिय और प्रतिबंधित गेम की पहचान
टीम पहले यह पता लगाएगी कि कौन से गेम सबसे लोकप्रिय हैं और कौन से देश में प्रतिबंधित हैं। इसके बाद उन प्रतिबंधित गेमों पर कार्रवाई शुरू होगी। कंपनियों से मिले डाटा का उपयोग 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों की पहचान और उन्हें ब्लॉक या अलर्ट करने के लिए किया जाएगा। यह प्रक्रिया जल्द ही लागू होगी। पुलिस ने बताया कि हाल की घटनाओं में किशोर गेम में कैरेक्टर की जर्सी, हथियार और अन्य चीजें खरीदने के लालच में फंस रहे हैं। इसके लिए ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करते हैं, कभी-कभी माता-पिता से उधार लेकर भी। इससे किशोर मानसिक दबाव में गलत कदम उठा सकते हैं।
निशाने पर फ्री-फायर और अन्य गेम
साइबर क्राइम सेल के निशाने पर फ्री-फायर, एविएटर, ड्रीम-11, माय 11 सर्किल, जूपी लूडो, विन्जो गोल्ड जैसे गेम हैं। इनमें हार-जीत की बाजी लगाई जाती है और कई गेम नियमों के अनुसार प्रतिबंधित हैं। टीम इन सभी गेमों की जांच करेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम किशोरों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अहम है। ऑनलाइन गेमिंग के दौरान किसी भी प्रकार के नुकसान या अनहोनी से बचने के लिए यह निगरानी बेहद जरूरी है।
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