अमृता शेरगिल का कटऑउट लगना है
अमृता शेरगिल की पेंटिंग ‘सुमैर’
इस पेंटिंग को अमृता शेरगिल ने 1936 में बनाया था। इसका शीर्षक है, सुमैर। 'सुमैर' उनकी कलात्मक परिपक्वता का एक शानदार उदाहरण है। यह पेंटिंग उनकी चचेरी बहन सुमैर का एक संवेदनशील और मनमोहक पोर्ट्रेट है। इस कृति में अमृता ने यूरोपीय पोस्ट-इंप्रेशनिस्ट तकनीकों को भारतीय सौंदर्य शास्त्र के साथ मिलाया है। सुमैर को एक हरे रंग की साड़ी में दर्शाया गया है, जिसकी जीवंतता पृष्ठभूमि के लाल और भूरे रंग के साथ एक प्रभावशाली विरोधाभास पैदा करती है। उनके चेहरे पर चिंतनशील और उदासी के भाव हैं, जो उनकी आंतरिक भावनाओं को बड़ी संजीदगी से व्यक्त करते हैं।
अमृता के बारे में
अमृता शेरगिल भारतीय उमराव सिंह और हंगेरियन मां एनटॉयनेट शेरगिल की बेटी थीं। वो 30 जनवरी 1913 को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में पैदा हुईं। उनके पिता संस्कृत और फारसी के विद्वान और मां ओपेरा गायिका थीं। कला के प्रति अमृता के रुझान को देखते हुए उनके माता-पिता उन्हें पेरिस ले गए। वहां उन्होंने पेंटिंग की औपचारिक शिक्षा ली। 1934 में पेरिस से भारत लौटने के बाद, अमृता शेरगिल ने अपनी कला को भारतीय वास्तविकता के करीब लाने का प्रयास किया। 'सुमैर' उसी दौर का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। -फीचर डेस्क
