जीवन के बीज लाते धूमकेतु
पुच्छलतारों के विषय में भला कौन नहीं जानना चाहता। आजकल ऐसे कई पिंड सूर्य के करीब आ रहे हैं और धरती से उन्हें उनकी लंबी पूंछ से पहचाना जा सकता है। धूतकेतु (कॉमेट), जिन्हें पुच्छलतारा कहा जाता है, प्राचीनकाल से ही मानव के लिए कौतुहल का विषय रहे हैं। ग्रह और उपग्रहों की तरह इन पिंडों के भी नाम होते हैं। खास बात यह है कि कुछ पिंड सूर्य के पास नियमित आते हैं और कुछ को आने में हजारों या लाखों वर्ष का समय लग सकता है। धूमकेतु को सौर मंडल का प्राचीन अवशेष माना जाता है।
आधुनिक विज्ञान धूमकेतु को बर्फ, धूल और गैस का मिश्रण मानता है, जो सूर्य के पास आने पर पूंछ विकसित करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये जीवन के मूल बीज जैसे अमीनो एसिड, पानी और अन्य रासायनिक तत्व पृथ्वी पर ला सकते हैं। यह विचार ‘पैनस्पर्मिया’ सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें कहा जाता है कि जीवन के निर्माण ब्लॉक्स अंतरिक्ष से धूमकेतुओं या उल्कापिंडों के माध्यम से पृथ्वी पर पहुंचे। यह कनेक्शन दशकों से विवादास्पद रहा है, लेकिन हाल के अध्ययनों ने इसे मजबूत प्रमाण दिए हैं।-डॉ. इरफान ह्यूमन

पैनस्पर्मिया के अनुसार जीवन पृथ्वी पर स्वतः उत्पन्न नहीं हुआ, बल्कि अंतरिक्ष से आया है। धूमकेतु, जो सौर मंडल के बाहरी हिस्सों से आते हैं, कार्बनिक अणु जैसे अमीनो एसिड, पेप्टाइड्स और फॉस्फोरस ले जाते हैं। प्रारंभिक पृथ्वी पर इनकी टक्कर से ये तत्व सतह पर जमा हुए, जो जीवन की शुरुआत के लिए ‘प्रीबायोटिक सूप’ बनाते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि सौर मंडल के निर्माण के दौरान बने कार्बनिक पदार्थ पृथ्वी पर धूमकेतुओं से पहुंचे यानी पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत करने में धूमकेतुओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
पहले भी आ चुका है स्वान
धूमकेतु C/2025 R2 (स्वान), जिसे सामान्यतः स्वान धूमकेतु के नाम से जाना जाता है, एक लंबी अवधि का धूमकेतु है, जो सूर्य मंडल के बाहरी क्षेत्र से आया। यह 2025 के अक्टूबर महीने में पृथ्वी के निकट पहुंचने के कारण खगोलप्रेमियों के लिए विशेष रूप से रोचक रहा। यह धूमकेतु ओर्ट क्लाउड से उत्पन्न माना जाता है। ओर्ट क्लाउड सूर्य से हजारों खगोलीय इकाई दूर एक बर्फीली संरचना है। इसे 11 सितंबर, 2025 व्लादिमीर बेजुगली को खोजा गया, जो सोहो उपग्रह के स्वान कैमरे की छवियों का विश्लेषण कर रहे थे।

यह गैर-आवर्ती धूमकेतु है अर्थात् यह सूर्य की परिक्रमा के लिए 200 वर्ष से अधिक समय लेता है। सोहो मुख्य रूप से सौर हवा का अध्ययन करता है, लेकिन इसकी छवियां धूमकेतुओं की खोज के लिए उपयोगी साबित हुई हैं। इस धूमकेतु की कक्षा अंडाकार है, लेकिन उच्च विकेंद्रीकरण के कारण लगभग परवलयिक जैसी है। यह सूर्य के चारों ओर एक लंबी यात्रा करने वाला धूमकेतु है। वर्तमान में (अक्टूबर के अंत में), यह लगभग 6 वीं परिमाण की चमक के साथ नग्न आंखों से सीमित रूप से दिखाई दे सकता है, विशेष रूप से दूरबीनों से इसे देखा जा सकेगा। इस धूमकेतु को देखना एक दुर्लभ अवसर होगा, क्योंकि फिर यह हजारों वर्षों बाद लौटेगा।
पहली बार दिखा लेमन
धूमकेतु C/2025 A6 (लेमन), जिसे सामान्यतः लेमन धूमकेतु के नाम से जाना जाता है, एक लंबी अवधि का धूमकेतु है, जो सूर्य मंडल के बाहरी क्षेत्र, संभवतः ओर्ट क्लाउड से उत्पन्न हुआ है। यह 2025 के अक्टूबर-नवंबर में पृथ्वी के निकट पहुंचने और चमकदार होने के कारण खगोलप्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। अक्टूबर में यह धूमकेतु उत्तरी गोलार्ध में पूर्वोत्तर आकाश में सूर्योदय से पहले दिखाई दिया और इसकी चमक लगभग 7-8 मैग्निट्यूड के आसपास पहुंची, जो बाइनोकुलर से आसानी से दृश्यमान बनाती है। यह धूमकेतु C/2025 R2 (स्वान) के साथ अक्टूबर के अंत में डबल धूमकेतु घटना का हिस्सा बना। यह धूमकेतु माउंट लेमन सर्वे, जो कैटलीना स्काई सर्वे का हिस्सा, द्वारा 3 जनवरी, 2025 को खोजा गया। यह सर्वे एरिजोना, अमेरिका में स्थित है और क्षुद्रग्रहों व धूमकेतुओं की खोज के लिए जाना जाता है। ज्ञात हुआ है कि यह एक गैर-आवर्ती धूमकेतु है अर्थात् इसकी कक्षीय अवधि 200 वर्ष से अधिक है। इसकी चरम चमक अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में 31 अक्टूबर या 1 नवंबर के आसपास होगी और सूर्य के सबसे निकट 8 नवंबर को होगा। मध्य नवंबर तक यह दृश्यमान रहेगा, उसके बाद चमक कम हो जाएगी। यह लगभग 1,000 वर्षों में एक बार लौटता है।
दो एटलस धूमकेतु
3I/ATLAS (जिसे C/2025 N1 भी कहा जाता है) और C/2025 K1 (ATLAS) दोनों ही 2025 में खोजे गए धूमकेतु हैं, लेकिन ये मूल रूप से अलग-अलग प्रकार के हैं। 3I/ATLAS एक अंतरतारकीय धूमकेतु है, जो सौर मंडल से बाहर से आया है, जबकि C/2025 K1 एक लंबी अवधि का सौर मंडलीय धूमकेतु है, जो ओर्ट क्लाउड से उत्पन्न हुआ है। नीचे इनके मुख्य अंतरों की तुलना दी गई है। पहला एटलस धूमकेतु, जिसे अंतरतारकीय धूमकेतु 3I/ATLAS कहा जाता है। जुलाई 2025 में एटलस (Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System) से खोजा गया। यह सौर मंडल से बाहर से आया है और हाइपरबोलिक कक्षा में है।

यह कन्या नक्षत्र में स्थित है। सूर्य के सबसे निकट पहुंचने की तारीख 30 अक्टूबर 2025 है (1.4 खगोलीय इकाई दूरी पर), लेकिन दिसंबर 2025 की शुरुआत में सूर्य के दूसरी ओर से फिर दिखाई देगा। इसकी पृथ्वी के सबसे निकट पहुंच 19 दिसंबर 2025 को 1.8 खगोलीय इकाई (लगभग 269 मिलियन किमी) पर होगी।
दूसरा धूमकेतु C/2025 K1, जिसे सामान्यतः एटलस धूमकेतु के नाम से जाना जाता है, एक हाइपरबोलिक (अवर्ती) धूमकेतु है, जो सूर्य मंडल के बाहरी क्षेत्र से आया है। यह ओर्ट क्लाउड से उत्पन्न माना जाता है और 2025 के अक्टूबर में सूर्य के अत्यंत निकट पहुंचने के कारण खगोलप्रेमियों के लिए रोचक, लेकिन चुनौतीपूर्ण है।
यह धूमकेतु स्वान और लेमन के साथ अक्टूबर के ‘ट्रिपल धूमकेतु’ घटना का हिस्सा है, लेकिन इसकी चमक अपेक्षाकृत कम है। यह 25 मई 2025 को चिली में खोजा गया। यह एक गैर-आवर्ती धूमकेतु है, लेकिन इसकी विकेंद्रीकरण होने से हाइपरबोलिक कक्षा है अर्थात् यह सूर्य मंडल से बाहर चला जाएगा और फिर कभी लौटेगा नहीं। इसके पृथ्वी के निकटतम दृष्टिकोण की बात करें, तो यह 25 नवंबर 2025, 0.40 खगोलीय इकाई (60 मिलियन किमी) पर रहेगा। यह धूमकेतु अवर्ती होने के कारण कभी लौटेगा नहीं, इसलिए 2025 में इसे देखने का यह एक सुनहरा अवसर है।
इन दोनों एटलस धूमकेतुओं के ये अंतर मुख्य रूप से उनकी उत्पत्ति, कक्षा और अवलोकन क्षमता पर आधारित हैं। 3I/ATLAS सौर मंडल के बाहर की दुनिया की झलक देता है, जबकि C/2025 K1 सूर्य के निकट आने से उज्ज्वल, लेकिन जोखिमपूर्ण है। वर्तमान में दोनों ही दूरबीनों से देखे जा सकते हैं। स्टेलेरियम जैसे ऐप से आप घर बैठे इन धूमकेतुओं की वर्तमान स्थिति जांच सकते हैं।
