लव बर्ड्स : मोहब्बत जो वक्त से जीत गई
कहते हैं, कुछ कहानियां वक्त नहीं, एहसास लिखते हैं। ऐसी ही एक कहानी है शिवेंद्र और दिव्या की, जिसमें न सिर्फ प्यार है, बल्कि संघर्ष, जिद्द और उस मुस्कुराहट की मिठास भी है, जो हर रिश्ते को जिंदा रखती है। शिवेंद्र और दिव्या की मुलाकात किसी फिल्मी अंदाज में नहीं हुई थी, पर जो हुआ वो दिल के इतने करीब था कि याद बन गया। कॉलेज के दिनों में जब शिवेंद्र ने पहली बार दिव्या को देखा, तो बस एक पल को लगा, “यही है वो”, लेकिन उस ‘एक पल’ को रिश्ते में बदलने के लिए उन्हें वक्त, हिम्मत और बहुत सारी कोशिशें करनी पड़ीं। दिव्या का सादापन और उसकी मुस्कान, दोनों में एक सुकून था। वहीं शिवेंद्र की बातों में वो अपनापन था, जो किसी को भी खींच ले। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे बातों, मुलाकातों और इंतजारों में बदलती चली गई। हर दिन एक नया बहाना ढूंढना, हर बार एक नया कारण बनाना कि कहीं न कहीं मिल सकें। यही उनका रोजमर्रा का रोमांच बन गया था।
रूठने-मनाने का सिलसिला तो जैसे इनकी कहानी की धड़कन थी। दिव्या की नाराजगी अक्सर बेवजह होती, पर शिवेंद्र को उसे मनाने का हर बहाना अच्छा लगता था। कभी एक छोटी-सी चॉकलेट, कभी एक नोटबुक के बीच रखा खत, तो कभी बस एक चुप्पी में भरा माफीनामा- यही था उनका प्रेम का तरीका, लेकिन जब बात शादी तक पहुंची, तब जिंदगी ने उनकी परीक्षा ली। घरवालों को मनाना, समाज की नजरों से लड़ना, अपने सपनों को संभालते हुए रिश्ते को बचाना- दोनों के लिए आसान नहीं था।
दिव्या के घर में हजार सवाल और शिवेंद्र के मन में सिर्फ एक जवाब- “वो मेरी जिंदगी है।” कई रातें बेचैनी में गुजरीं, कई दिन उम्मीद में। कभी सब ठीक लगता, तो कभी सब बिखरता नजर आता, लेकिन दोनों ने तय कर लिया था कि हार नहीं माननी। शादी की तारीख तय होने तक दोनों के दिलों में जैसे तूफान था- कहीं कुछ रुक न जाए, कहीं ये सफर अधूरा न रह जाए। फेरों के दिन जब शिवेंद्र ने दिव्या की आंखों में देखा, तो वहां सिर्फ आंसू नहीं थे- वहां सालों की जद्दोजहद, इंतजार और जीत की चमक थी। जब पंडित ने कहा “सप्तपदी पूर्ण हुई”, तो ऐसा लगा जैसे वक्त ठहर गया हो। हर धड़कन ने कहा- “अब सब ठीक है।”
आज सालों बाद भी जब शिवेंद्र और दिव्या अपनी पुरानी तस्वीरें देखते हैं, तो चेहरे पर वही मुस्कान लौट आती है। वो कहते हैं- “प्यार वही सच्चा है, जो वक्त से डरता नहीं और रिश्ते वही मुकम्मल हैं, जो रूठने-मनाने में टूटते नहीं।” उनकी कहानी इस बात का सबूत है कि मोहब्बत अगर सच्ची हो, तो मंजिल देर से सही, पर मिलती जरूर है। फोटो चाहे पुरानी हो या नई, पर उनकी कहानी हर फ्रेम में मुस्कुरा रही है। क्योंकि शिवेंद्र और दिव्या ने सिर्फ एक-दूसरे से नहीं, जिंदगी से भी मोहब्बत की है।--शिवेंद्र और दिव्या
