बाराबंकी : दो घंटे मृत पड़ी रही प्रसूता, डाक्टर करते रहे रेफर, निजी अस्पताल की करतूत उजागर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

रामनगर, बाराबंकी, अमृत विचार : क्षेत्र में कटियारा स्थित ग्रीन हॉस्पिटल एक बार फिर चर्चा में है। मंगलवार को प्रसव के बाद प्रसूता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अस्पताल के चिकित्सकों ने इलाज में लापरवाही से हुई मौत को छिपाने की कोशिश की और परिजनों के हंगामे के बाद उसे रेफर करने की खानापूर्ति कर दी। जब परिजन महिला को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि प्रसूता की मौत दो घंटे पहले ही हो चुकी है।

मामला थाना रामनगर क्षेत्र के ग्राम रजनापुर मजरे गोबरहा का है। यहां के निवासी तिवारी गौरीकान्त मिश्रा ने अपनी पुत्री लक्ष्मी का विवाह लखनऊ के भीखमपुर पेपर मिल कॉलोनी, निशातगंज निवासी वीरेंद्र तिवारी से किया था। प्रसूता इन दिनों अपने मायके में रह रही थी। मंगलवार को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर आशा संगिनी के माध्यम से उसे कटियारा स्थित ग्रीन हॉस्पिटल ले जाया गया। परिजनों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने 25,000 का पैकेज तय कर लक्ष्मी को भर्ती किया और ऑपरेशन से शाम 5 बजे बच्ची का जन्म हुआ।

बुधवार सुबह प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी लेकिन चिकित्सकों ने कोई ध्यान नहीं दिया। परिजनों के अनुसार, इलाज में लापरवाही से प्रसूता की मौत हो गई। जब उन लोगों ने हंगामा किया तो अस्पताल स्टाफ ने हालत गंभीर बताकर रेफर का पर्चा बना दिया। परिजन तैयार नहीं हुए तो अस्पताल की ओर से पुलिस बुलाकर प्रसूता को एंबुलेंस से जबरन सीएचसी रामनगर भेज दिया गया। एक कदम आगे जाकर सीएचसी रामनगर पर मौजूद चिकित्सक ने बिना उचित जांच किए महिला को जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल में मौजूद इमरजेंसी डॉक्टरों ने बताया कि महिला की मौत दो घंटे पहले ही हो चुकी थी। 

परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सीएमओ डा. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। टीम गठित की गई है। जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रहीं प्रसूताएं

यह कोई पहला मामला नहीं है जब आशा बहुओं की कमीशनखोरी के चलते किसी प्रसूता की जान गई हो। सूत्रों के मुताबिक, कई बार आशा कार्यकर्ता प्रसूताओं को सरकारी अस्पताल न ले जाकर प्राइवेट अस्पतालों में 'बेहतर इलाज' का झांसा देकर भर्ती करवाती हैं, जहाँ अस्पताल प्रबंधन डिलीवरी के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं और बाद में आशा कार्यकर्ताओं को तय कमीशन दिया जाता है। रामनगर क्षेत्र में इससे पहले भी ऐसे मामलों में कई मौतें हो चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई न होने से यह अवैध गठजोड़ लगातार फल-फूल रहा है। खास बात यह कि सीएचसी रामनगर से जिला मुख्यालय ले जाई गई मृतका लक्ष्मी को भी आशा संगिनी के माध्यम से ही वापस ग्रीन हॉस्पिटल ले जाया गया था।

विवादों से ग्रीन अस्पताल का पुराना नाता

ग्रीन हॉस्पिटल का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है। पहले यह अस्पताल बुढ़वल गांव में संचालित था, जहाँ एक महिला मरीज ने अस्पताल संचालक पर छेड़खानी का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी थी। उस समय भी मामला 'सेटिंग-गेटिंग' में दब गया। इसके कुछ समय बाद अस्पताल को कटियारा गांव में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां इलाज के नाम पर गरीब मरीजों से मनमानी वसूली की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। अब प्रसूता लक्ष्मी की मौत ने एक बार फिर इस अस्पताल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उधर मृतका के पिता गौरीकान्त मिश्रा ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से ग्रीन हॉस्पिटल और संबंधित चिकित्सकों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

संबंधित समाचार