Arattai: डिजिटल संवाद का स्वदेशी अध्याय

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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भारत के डिजिटल परिदृश्य में इस समय एक नया नाम तेजी से सुर्ख़ियों में है- Zoho का ‘अरट्टई’ (Arattai) ऐप। सितंबर–अक्टूबर 2025 के बीच इसके डाउनलोड्स में अचानक उछाल आया और यह कुछ ही हफ्तों में ऐप स्टोर्स की शीर्ष सूची में जगह बना गया। ‘अरट्टई’ तमिल भाषा का शब्द है, जिसे ‘गपशप’ अथवा ‘आकस्मिक बातचीत’ के संदर्भ में इस्तेमाल किया जा सकता है। जनवरी 2021 में लॉन्च हुआ यह ऐप चार साल तक लगभग गुमनाम रहा, लेकिन अब “आत्मनिर्भर भारत” की नई लहर के बीच यह भारतीय तकनीक का प्रतीक बनकर उभरा है।-डॉ. शिवम भारद्वाज असिस्टेंट प्रोफेसर, जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा 

Zoho की साख और आत्मनिर्भर भारत की भावना

Zoho उन कुछ भारतीय कंपनियों में है, जो बिना विदेशी निवेश के वैश्विक पहचान बना चुकी है। संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेम्बूके नेतृत्व चेन्नई मुख्यालय वाली यह कंपनी बीते दो दशकों से विश्व स्तर पर सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) क्षेत्र में भारत की पहचान रही है। इसके 55 से अधिक प्रोडक्ट्स - जैसे Zoho Mail, Zoho CRM, Zoho Books, Zoho Workplace और Zoho Cliq दुनियाभर के तमाम देशों में उपयोग किए जाते हैं। हाल में Zoho एक बड़ी खबर यह भी आई कि केंद्र सरकार के कई विभागों और निकायों ने NIC से Zoho Mail पर डेटा माइग्रेशन शुरू किया है, ताकि देशी सर्वरों पर होस्टेड और अधिक सुरक्षित ईमेल व्यवस्था स्थापित की जा सके। इससे कंपनी की साख को और मजबूती दी और यह दिखाया कि भारत अब वैश्विक विकल्पों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी तकनीकी क्षमता पर भरोसा करने लगा है।

ऐसे में जब इसी कंपनी ने एक मैसेजिंग ऐप पेश किया, तो स्वाभाविक रूप से लोगों में उत्सुकता बढ़ी। अरट्टई को आज के डिजिटल भारत की नई कहानी बनाने और इस अप्रत्याशित उछाल के पीछे भारतीय तकनीकी कंपनियों पर भरोसा, विदेशी ऐप्स के प्रति सतर्कता, डेटा सुरक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता जैसे कारक तो हैं ही, लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका वैश्विक अनिश्चितताओं, जैसे कि तकनीक की उपलब्धता अथवा टैरिफ संकट, से भरे माहौल में‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी’ अपनाने की अपील ने निभाई है।  

लोकप्रियता की रफ़्तार और शुरुआती तकनीकी झटके

सितंबर 2025 में अरट्टई की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि Zoho के सर्वरों को भी संभलने का मौका नहीं मिला। लाखों की तादाद में नए उपयोगकर्ता जुड़ने लगे और उसके साथ सामने आईं OTP में देरी, कॉल में लैग और सिंक की समस्याएं। यह दौर हर उभरते प्लेटफॉर्म के लिए सीख का होता है। तेजी से आगे बढ़ने के साथ स्थायित्व का संतुलन जरूरी है। Zoho ने भी सर्वर क्षमता बढ़ाकर स्थिति संभाली। 

क्या बनाता है अरट्टई को अलग

Zoho ने अरट्टई को केवल चैटिंग ऐप नहीं, बल्कि एक समग्र संचार मंच के रूप में विकसित किया है। इसके फीचर्स इस दिशा को स्पष्ट करते हैं-

1. पॉकेट- आपकी निजी डिजिटल तिजोरी

इस फीचर में आप अपने नोट्स, फोटो, वीडियो और दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं, जो लोग WhatsApp पर खुद को मैसेज भेजकर चीजें सहेजते हैं, उनके लिए यह सुविधा गेमचेंजर साबित हो सकती है।

2. मीटिंग्स टैब- वीडियो कॉल का नया रूप

बिना Zoom या Google Meet जैसे अलग ऐप्स पर जाए, अरट्टई में ही सीधे वीडियो मीटिंग्स आयोजित की जा सकती हैं।

3. मेंशन्स टैब-

इस टैब में वे सभी चैट्स एक जगह मिलती हैं, जिनमें उपयोगकर्ता को टैग या उल्लेख किया गया है। यह व्यस्त पेशेवरों के लिए राहत का फीचर है।

4. Android TV पर उपलब्धता

मोबाइल और लैपटॉप/डेस्कटॉप के साथ अरट्टई Android TV पर भी उपलब्ध है, अर्थात संवाद का दायरा घर के बड़े पर्दे तक पहुंच गया है।

डेटा सुरक्षा पर कंपनी का भरोसा

Zoho ने स्पष्ट किया है कि अरट्टई पर कोई विज्ञापन नहीं होगा, डेटा किसी को नहीं बेचा जाएगा और भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा भारत के सर्वरों (मुंबई, दिल्ली, चेन्नई) में ही रखा जाएगा। हालांकि, फिलहाल टेक्स्ट चैट्स के लिए पूर्ण एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन लागू नहीं हुआ है, लेकिन कंपनी का कहना है कि यह सुविधा जल्द ही जोड़ी जाएगी और इसके लिए एक सुरक्षा श्वेतपत्र जारी किया जाएगा। यह कदम डेटा पारदर्शिता की दिशा में एक मजबूत संकेत है, जो उपयोगकर्ताओं में विश्वास को और बढ़ाने में मदद कर सकता है।

भविष्य की दिशा: संवाद से भुगतान तक

खबरों के अनुसार, Zoho अब ‘Zoho Pay’ नाम से UPI भुगतान सेवा भी लाने की तैयारी में है। यदि यह सेवा भविष्य में अरट्टई से जुड़ती है, तो ऐप चैट्स, मीटिंग्स और पेमेंट्स तीनों को एकीकृत अनुभव के रूप में पेश कर सकेगा। इससे अरट्टई सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं, बल्कि भारत का पहला संपूर्ण डिजिटल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म बन सकता है। हालांकि इसके साथ नई जिम्मेदारियां भी आएंगी- वित्तीय सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और नियामक पालन की।

Hike और Koo की यादें, पर एक नया सलीका

भारत ने इससे पहले भी स्वदेशी सोशल ऐप्स की लहर देखी है। Hike मैसेंजर और Koo जैसे प्लेटफॉर्म एक समय खासी चर्चा में रहे, पर समय के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के सामने कमजोर पड़ते गए और अंततः बंद हो गए। उनका अनुभव सिखाता है कि भावनाओं का ज्वार शुरुआत करा सकता है, पर स्थायित्व के लिए उपभोक्ताओं का भरोसा, दीर्घकालिक टिकाऊ बिजनेस मॉडल और निरंतर सुधार बेहद जरूरी हैं। Zoho के पास अनुभव और संसाधन हैं और यही अरट्टईकी सफलता में सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकते हैं।

भारत की डिजिटल परिपक्वता की मिसाल

तकनीक की दुनिया में ट्रेंड बदलते हैं, पर भरोसा और प्रदर्शन स्थायी रहते हैं। अरट्टई इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल “डिजिटल आत्मनिर्भरता” की बातें नहीं कर रहा, बल्कि उसे जी रहा है। यह दिखाता है कि भारतीय कंपनियां न सिर्फ तकनीकी रूप से सक्षम हैं, बल्कि अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने को भी तैयार हैं। भरोसा, सुरक्षा और निरंतर सुधार यही वे तीन स्तंभ हैं, जिन पर कोई भी डिजिटल मंच स्थायी बन सकता है। यदि अरट्टई इन तीनों कसौटियों पर खरा उतरा, तो यह केवल एक ऐप नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल आत्मविश्वास की पहचान बनेगा।

भरोसे से बनेगा स्वदेशी नवाचार का भविष्य

तकनीक की दुनिया में ट्रेंड बदलते हैं, पर भरोसा और प्रदर्शन स्थायी रहते हैं। अरट्टई की सफलता यह साबित कर सकती है कि स्वदेशी नवाचार अब भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और विश्वसनीय दिशा ले चुका है। यह ऐप भारत के डिजिटल भविष्य की उस कहानी का हिस्सा है, जहां आत्मनिर्भरता सिर्फ विचार नहीं, व्यवहार बन चुकी है।

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