जब कार बन जाए आपकी खास पहचान
कारें हमेशा से ही सिर्फ सफर का जरिया नहीं रही हैं, बल्कि समाज में स्टेटस सिंबल और पर्सनैलिटी का आईना भी रही हैं, लेकिन जब कार को सिर्फ ड्राइव करने भर का साधन न मानकर उसे अपनी जरूरत और लाइफस्टाइल के हिसाब से ढालने की चाहत जगी, तभी कस्टमाइजेशन की दुनिया का जन्म हुआ। कार निर्माताओं या शोरूम के साथ शुरू हुआ, यह सिलसिला जहां सामान्य ग्राहक के लिए एसेसरीज के नाम पर एक बड़ा बाजार बन चुका है, वहीं अमीरों और सेलिब्रेटीज के लिए उनके शौक और शख्सियत की पहचान का हिस्सा है। इसके चलते आज कारों का कस्टमाइजेशन चाहत और पसंद से आगे बढ़कर पर्सनल ब्रांडिंग का प्रतीक जैसा बन चुका है। ऐसे में कस्टमाइजेशन की दुनिया का यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘कार वही, पर पहचान सिर्फ आपकी।’ जाहिर है, जो कार कल तक सिर्फ सफर का साधन थी, आज वह आपकी पहचान और पर्सनैलिटी का हिस्सा है। कस्टमाइजेशन अब लग्जरी नहीं, बल्कि पर्सनल ब्रांडिंग है। इलेक्ट्रिक कारों और सस्टेनेबल मटेरियल के साथ इसका अब नया दौर शुरू हो चुका है। एआई बेस्ड इंफोटेनमेंट और स्मार्ट सेफ्टी फीचर्स जल्दी ही कार को पर्सनल स्पेस तथा टेक्नोलॉजी का कॉम्बो बना देंगे।-मनोज त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार, कानपुर
सोने-चांदी की फिटिंग से लेकर हाथी दांत की सजावट तक
20 वीं सदी की शुरुआत में जब यूरोप और अमेरिका में कारें अमीरों का खिलौना मानी जाती थीं, तभी से रईस लोग इन्हें अपनी पसंद और सुविधा के मुताबिक बदलवाने लगे थे। 1920-30 के दशक में रॉल्स-रॉयस, बेंटले और कैडिलैक जैसी कंपनियों के लिए ‘कोच बिल्डिंग’ का दौर चला, इसमें कार की बॉडी और इंटीरियर ग्राहकों की पसंद से तैयार किए जाते थे। बात भारत की करें, तो यहां पर कस्टमाइजेशन का ट्रेंड शाही रियासतों से शुरू हुआ। अनेक राजा-महाराजाओं ने अपनी कारों को सोने-चांदी की फिटिंग, हाथी दांत की सजावट और यहां तक कि हथियार रखने की जगह तक के साथ बनवाया। किसी ने उसे शानदार बग्घी का स्वरूप दिया, तो किसी ने शाही सवारी जैसा बनवाया। जहां तक दुनिया की बेहतरीन कस्टमाइज्ड कार की बात है, तो सबसे ऊपर रॉल्स-रॉयस स्वेप्टेल का नाम आता है। यह अब तक की सबसे महंगी कस्टमाइज्ड कार गिनी जाती है, जिसे करीब 96 करोड़ रुपये खर्च करके एक अनाम अरबपति ने अपनी लग्जरी यॉट से इंस्पायर्ड डिजाइन कराया था।
देश में कस्टमाइज्ड कार की औसत लागत
- बेसिक मॉडिफिकेशन 2 से 5 लाख रुपये में कराया जा सकता है। इसमें अलॉय व्हील्स, बॉडी किट, सीट कवर, लाइटिंग जैसी चीजें शामिल रहती हैं।
- प्रीमियम कस्टमाइजेशन कराने पर खर्च 10 से 30 लाख रुपये तक हो सकता है। इसमें नया इंटीरियर, कस्टम पेंट,
एंटरटेनमेंट सिस्टम, लग्जरी सीटिंग जैसे बदलाव किए जा सकते हैं।
- हाई एंड कस्टमाइजेशन कराने पर खर्च बढ़कर 50 लाख से 5 करोड़ तक पहुंच सकता है। इस तरह के बदलाव में
बुलेटप्रूफिंग, एआई-इंटिग्रेटेड डैशबोर्ड, होम-थिएटर जैसी टेक्नोलॉजी, पूरी तरह नया बॉडी डिजाइन जैसी चीजों का चुनाव किया जाता है।
कस्टम कारों के हॉट फीचर्स
• 360 डिग्री रोटेटिंग रिक्लाइनर सीटें
• होम थिएटर तथा गेमिंग सेटअप
• मिनी फ्रिज और काफी मशीन
• स्मार्ट लाइटिंग व एआई असिस्टेंट
• कार्बन-फाइबर बॉडी किट
• इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड कन्वर्जन
देश की सबसे महंगी कस्टमाइज कार है पूनावाला के पास
भारत की सबसे महंगी कस्टमाइज कार के मामले में योहान पूनावाला की रोल्स-रॉयस फैंटम VIII EWB (Bohemian Red) को गिना जाता है, जिसकी कीमत 22 करोड़ से ज्यादा है। इसमें सॉलिड गोल्ड स्पिरिट ऑफ एक्स्टसी और इल्युमिनेटेड फ्रंट ग्रिल जैसे विशेष कस्टमाइजेशन किए गए हैं। देश की महंगी कस्टमाइज कारों में नीता अंबानी की रोल्स-रॉयस फैंटम VIII EWB (Rose Quartz) और मुकेश अंबानी की बुलेटप्रूफ रोल्स-रॉयस कलिनन भी शामिल हैं। इनके अलावा फिल्म अभिनेता शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, रणवीर सिंह ने भी अपनी कारों को अपनी पसंद के मुताबिक कस्टमाइज्ड कराने पर बड़ी रकम खर्च की है।
सितारों के लिए पर्सनैलिटी सिग्नेचर जैसी उनकी गाड़ियां
भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी हार्दिक पांड्या ने बीते दिनों अपनी सुपर एसयूवी लोबर्गिनी का मेकओवर करके चर्चा पाई थी। उन्होंने गाड़ी के चमकीले पीले रंग को बोल्ड मेटलिक ग्रे रंग में बदलने के साथ व्हील्स में भी मनपंसद बदलाव कराकर स्मार्ट लुक दिया है। पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम कप्तान रोहित शर्मा ने अपनी लैंबोर्गिनी उरुस को इंडियन टीम की जर्सी के रंग से मेल खाते ब्लू इलियोस रंग में कस्टमाइज कराया था। इसी तरह बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ तो अपनी अनूठी पर्सनैलिटी और कार कलेक्शन के लिए जाने जाते हैं।
इसी साल की शुरुआत में उन्होंने मेटैलिक ग्रे शेड में कस्टम-बिल्ट टोयटा हीलक्स खरीदी थी। यह एक ऑफ रोडिंग पिकअप ट्रक है। इसमें आफ्टर मार्केट अलॉय व्हील्स और एलईटी लाइट्स लगाई गई हैं। इन कस्टमाइजेशन ने इस पिकअप ट्रक को और स्टाइलिश तथा ऑफ-रोडिंग के लिए सक्षम बना दिया। अभिनेता जॉन अब्राहम भी कस्टमाइजेशन के दीवाने हैं। उनके पास एक कस्टमाइज्ड ऑडी क्यू-7 और मारुति जिप्सी है, जिन्हें उन्होंने पसंद के अनुसार मॉडिफाई कराया था। अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने कस्टमाइज्ड रोल्स-रॉयस खरीदी थी। दीपिका पादुकोण ने अपनी पसंदीदा कारों मर्सिडीज-मेबैक जीएलएस 600 और ऑडी क्यू -8 को अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज करा रखा है।
कस्टमाइजेशन के फायदे
- कार कस्टमाइजेशन से आपकी गाड़ी को एक आकर्षक तथा अनोखी पहचान मिलती है।
- यह व्यक्तिगत शैली और पसंद को दर्शाने का एक तरीका भी है।
-कस्टमाइजेशन से कार के प्रदर्शन और खूबसूरती में सुधार किया जा सकता है।
-इससे कार को एक नया लुक और लोग मुड़कर देखने के लिए बाध्य होते हैं।
कारों का हुलिया बदलने का हुनर रखने वाले प्रमुख शिल्पकार
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कार डिजाइनरों में जियोर्जेटो गिउगिआरो का नाम आता है, जिन्हें ‘सदी के कार डिजाइनर’ के रूप में चुना गया था। उनके अलावा मार्सेलो गैंडिनी, जिन्होंने लेम्बोर्गिनी जैसी सुपरकारों के लिए पहचानी जाने वाली कई प्रतिष्ठित डिजाइन बनाई हैं तथा बतिस्ता फरीना जिन्होंने फेरारी के लिए कई क्लासिक डिजाइन बनाए हैं, के नाम आते हैं। भारत में डीसी डिजायन या दिलीप छाबारिया डिजाइन स्टूडियो को कार कस्टमाइजेशन की कला को नए मुकाम पर पहुंचाने का श्रेय जाता है।
उनकी बनाई कारें जैसे कस्टमाइज्ड टोयोटा इनोवा, बुलेटप्रूफ एसयूवी और फिल्मी सितारों के लिए डिजाइन की गई लिमोजीन लोगों के बीच आइकॉनिक बनीं। फिल्म ‘टार्जन की द वंडर’ कार का डिजाइन उन्होंने ही किया था। उनके बाद आकांक्षा सेठी का नाम लिया जाता है। देश में कई बुटीक ऑटो स्टूडियो भी डिमांड कस्टमाइजेशन के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। इनमें दिल्ली में ऑटोसाई, गुरुग्राम में बिग डैडी, मुंबई में रीवैम्प मोटर्स जैसे नाम शामिल हैं।
