मेरा शहर मेरी प्रेरणा : सरकारी डॉक्टर बनने की चाह ने बुलंदियों तक पहुंचाया, अभी भी जारी सेवा भाव
सिविल लाइंस निवासी डॉ. एसके गर्ग ने 1988 में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (अब केजीएमयू) से एमबीबीएस की पढ़ाई पूर्ण की, इसके बाद इसी कॉलेज से विशेषज्ञता में एमडी चेस्ट की पढ़ाई की। डॉ. गर्ग बताते हैं कि मेरे पिता सोहन लाल सरकारी विभाग में इंजीनियर थे, लेकिन दादा मुझे पिता की तरह ही इंजीनियर बनने को प्रेरित करते लेकिन पिता जब भी किसी सरकारी अस्पताल में निर्माण संबंधी कार्य के लिए जाते तो एक डॉक्टर को देखकर प्रभावित होते थे और मुझे डॉक्टर बनने के लिए कहा करते थे।
मैंने वर्ष 1988 में चेस्ट फिजिशियन की पढ़ाई पूरी करते ही स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं आरंभ कर दीं। डॉ. सुधीर कुमार गर्ग शाहजहांपुर और बरेली में बतौर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात रहे। लेकिन उन्होने इन शीर्षस्थ पदों पर आसीन होने से पहले ही एक डॉक्टर और मरीज के प्रति सेवा के भाव को सार्थक कर दिया था।
डॉ. गर्ग बतातें हैं कि वर्ष 1998 से 2004 तक बरेली जिला अस्पताल में टीबी वार्ड प्रभारी रहकर मरीजों का इलाज किया, वहीं 2017 से 2020 तक बरेली में ही जिला क्षय रोग अधिकारी रहते हुए व्यापक रुप से अभियान चलाकर 50 हजार से अधिक टीबी के लक्षण वाले रोगी नोटिफाई किए। जो कि अब तक सबसे अधिक आंकड़ा है।
इतना ही नहीं बरेली के अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (एडी हेल्थ) के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्ष 2022 से ही घर पर ही क्लीनिक खोलकर टीबी रोगियों का नि:शुल्क इलाज करना आरंभ कर दिया जो कि वर्तमान में भी जारी है। चौपुला चौराहा स्थित अपने निजी निवास पर रोजाना 30 से 40 मरीजों को क्लीनिक पर ही इलाज दे रहे हैं।
