मेरा शहर मेरी प्रेरणा : बरेली में जटिल हड्डी रोगों का मिल रहा उपचार

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Edited By Amrit Vichar
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रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, बरेली का आर्थोपेडिक्स विभाग लोगों को हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी बेहतरीन सुविधाएं देने के लिए समर्पित है। यह विभाग नई तकनीकों और अच्छी देखभाल के ज़रिए इलाज के स्तर को और बेहतर बना रहा है।

स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में भी बरेली में तेज़ी से बदलाव देखने को मिले हैं। रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. वरुण अग्रवाल इस बदलाव को लाने वाले एक मुख्य विशेषज्ञ के तौर पर सामने आए हैं। उन्होंने ऑपरेशन के नए तरीकों, जैसे- छोटे चीरे वाली (मिनिमली-इनवेसिव), दूरबीन वाली (एंडोस्कोपिक) और रोबोट की मदद से होने वाली प्रक्रियाओं के स्तर को बहुत ऊंचा कर दिया है।

डॉ. अग्रवाल ने यहां देश का पहला ऐसा इंटीग्रेटेड स्पाइन सेंटर शुरू किया है, जहां एक साथ तीन आधुनिक तकनीकें मौजूद हैं। सर्जरी में सटीकता लाने के लिए रोबोटिक सिस्टम का उपयोग, ऑपरेशन के दौरान सही रास्ता दिखाने वाली आधुनिक तकनीक 3डी नेविगेशन, हाई-क्वालिटी इमेजिंग इन तकनीकों में शामिल है। नई तकनीकों से रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन, जोड़ बदलने (टोटल जॉइंट रिप्लेसमेंट) की सर्जरी, छोटे चीरे वाले फ्रैक्चर ऑपरेशन और टेढ़ेपन को ठीक करने जैसे जटिल ऑपरेशन ज़्यादा सटीक और सुरक्षित हो गए हैं।

डॉ. वरुण बताते हैं कि हमारी ट्रॉमा केयर यूनिट 24 घंटे, सातों दिन काम करती है। यह तेज़ गति से होने वाली दुर्घटनाओं और कई चोटों वाले मुश्किल मामलों को संभालने में सक्षम है। यहां डॉक्टरों की टीम गोल्डन आवर (चोट लगने के बाद का सबसे ज़रूरी समय) में तुरंत इलाज शुरू कर देती है। हम सिर्फ बरेली ही नहीं, बल्कि आस-पास के ज़िलों, उत्तराखंड के दूरदराज़ इलाकों और भारत-नेपाल सीमा से आने वाले मरीज़ों का भी इलाज कर रहे हैं। लोग यहां आधुनिक, भरोसेमंद और जटिल हड्डी रोग के इलाज के लिए आते हैं।

डॉ वरुण बताते हैं कि हमारा मिशन हर जगह अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है,  इसके लिए, हम नियमित रूप से गांव-गांव जाकर कैंप लगाते हैं, मोबाइल जांच सेवाएं देते हैं और मुफ़्त ऑपरेशन प्रोग्राम चलाते हैं, ताकि ग़रीब लोग भी शहरों जैसी अच्छी सुविधाएं पा सकें। डॉ. वरुण अग्रवाल के मार्गदर्शन में टीम ने गांवों और छोटे शहरों में बहुत सारे मुफ़्त स्पाइन हेल्थ कैंप लगाए हैं। इन कैंपों से उन मरीजों तक मदद पहुंची जो शहरों के अस्पतालों तक नहीं आ पाते।

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