Moradabad: सर्दी में नवजातों की पहली सांस पर खतरा, पेरिनेटल एस्फिक्सिया से जंग
मुरादाबाद, अमृत विचार। कड़ाके की सर्दी और शीतलहर के बीच जिला महिला अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं के सामने पेरिनेटल एस्फिक्सिया गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। ठंड के मौसम में प्रसव के बाद बच्चों को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाना उनकी जान के लिए खतरा बन रहा है। महिला अस्पताल में होने वाले औसत प्रसवों में से लगभग 25 से 30 प्रतिशत यानी हर 10 में से करीब तीन नवजात जन्म के तुरंत बाद ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं।
अस्पताल के डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ अंबू बैग मशीन के माध्यम से कृत्रिम सांस देकर बच्चे के फेफड़ों को सक्रिय करते हैं, ताकि शरीर और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू हो सके। जिला महिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. किरन पांडे ने बताया कि पेरिनेटल एस्फिक्सिया वह स्थिति है, जब जन्म के समय या उसके तुरंत बाद बच्चे के मस्तिष्क और अन्य अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके प्रमुख लक्षणों में जन्म के समय बच्चे का न रोना, सांस लेने में कठिनाई, शरीर में सुस्ती या नीला पड़ना शामिल है। यदि समय रहते उपचार न मिले तो यह स्थिति नवजात के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। समय से पहले जन्म लेने वाले यानी प्री-मैच्योर बच्चों में इसका खतरा और अधिक होता है।
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता ने बताया कि ऐसे बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते, जिसके कारण उनमें संक्रमण (सेप्सिस) और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा दोगुना हो जाता है। ठंड के मौसम में यह जोखिम और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, संतुलित आहार और सुरक्षित प्रसव से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान मां को समय-समय पर अल्ट्रासाउंड और जरूरी ब्लड टेस्ट कराते रहना चाहिए, ताकि किसी भी जटिलता का समय रहते पता चल सके। साथ ही सर्दी के मौसम में नवजात को संक्रमण से बचाना बेहद जरूरी है। बच्चे को गर्म कपड़ों में लपेटकर रखें, साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें और भीड़भाड़ से दूर रखें। यदि जन्म के बाद बच्चा सुस्त दिखाई दे, ठीक से सांस न ले रहा हो या दूध न पी रहा हो, तो बिना देर किए तुरंत अस्पताल या विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।
