लखनऊ में ठंड का कहर: बिजली मांग 1400 MW तक पहुंची, लेसा के फीडर-ट्रांसफार्मर ठिठुरे – घंटों गुल रह रही बिजली
लखनऊ, अमृत विचार : शहर में बिजली व्यवस्था सुधार के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने और वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बावजूद कड़ाके की ठंड में लेसा के फीडर और ट्रांसफार्मर जवाब देने लगे हैं। ठंड बढ़ने के साथ बिजली की खपत अचानक बढ़ गई है, जिससे शहरी और ग्रामीण इलाकों में फीडर व ट्रांसफार्मरों की ट्रिपिंग आम हो गई है। केबल फॉल्ट के चलते कई इलाकों में लोगों को घंटों बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है।
विभागीय कर्मचारियों के अनुसार सामान्य दिनों में बिजली की मांग करीब 900 मेगावाट रहती है, जो ठंड बढ़ने के कारण बढ़कर लगभग 1400 मेगावाट तक पहुंच गई है। ब्लोअर, हीटर, गीजर जैसे भारी बिजली उपकरणों के बड़े पैमाने पर उपयोग से खपत में अचानक उछाल आया है। इसका असर यह हुआ कि कई इलाकों में बिजली की आंख-मिचौली शुरू हो गई है। मांग को देखते हुए जनवरी माह में अघोषित कटौती की आशंका भी जताई जा रही है।
लेसा के चारों जोनों के करीब 150 से अधिक 33 केवी उपकेंद्रों के माध्यम से राजधानी के 30 लाख से अधिक छोटे-बड़े उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। पिछली गर्मियों में बिजली की मांग 2200 मेगावाट तक पहुंच गई थी। इस बार दिसंबर के अंतिम सप्ताह में ठंड शीतलहर में तब्दील हो चुकी है। जानकारों के मुताबिक चारों जोनों में कुल मिलाकर 300 से 400 मेगावाट तक अतिरिक्त मांग बढ़ी है। अमौसी जोन में लगभग 60 मेगावाट, जानकीपुरम में 50 मेगावाट, सेंट्रल जोन में 80 मेगावाट और गोमतीनगर जोन में करीब 100 मेगावाट मांग बढ़ी है।
लेसा अधिकारियों का कहना है कि ठंड में बिजली की मांग बढ़ना स्वाभाविक है और यह गर्मियों की तुलना में कम है। हालांकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि आरडीएसएस योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने और वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बावजूद बिजली आपूर्ति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। नई व्यवस्था के तहत 33, 11 केवी और एलटी लाइनों के लिए अलग-अलग अधिकारियों की तैनाती के बाद भी लोग घंटों बिजली गुल रहने की समस्या से जूझ रहे हैं।
ठंड के कारण बिजली की मांग जरूर बढ़ी है। सप्लाई बाधित होने या ट्रिपिंग की शिकायत मिलने पर तुरंत समाधान कराया जा रहा है।
वीपी सिंह, मुख्य अभियंता ट्रांसगोमती
