लखनऊ में इलाज की यह कैसी व्यवस्था ? खून की जांच के लिए मरीज को दौड़ाया 15 किलोमीटर
लखनऊ, अमृत विचार : किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में जांच का नमूना लेकर जांच के लिए पहुंचे मरीज के परिजनों को 15 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ी है। यह दौड़ बलरामपुर अस्पताल और केजीएमयू के बीच मरीज के परिजनों को लगानी पड़ी है। बलरामपुर अस्पताल से खून की जांच कराने पहुंचे परिजनों को बिना जांच के ही तीन बार वापस लौटना पड़ा। आरोप है कि केजीएमयू में उनके मरीज के खून की जांच का नमूना तब तक नहीं लिया गया, जब तक वरिष्ठ डॉक्टरों ने हस्तक्षेप नहीं किया। महज पर्चें का फार्मेट ठीक न होने की बात कह केजीएमयू के कर्मचारी लौटाते रहे और परिजन बलरामपुर अस्पताल से केजीएमयू तक दौड़ लगाते रहे।
दरअसल, अमेठी निवासी हिमांशु ने बताया कि उनके भाई की 5 साल की बेटी का बलरामपुर अस्पताल से इलाज चल रहा है, इस दौरान खून की कुछ जांचों के लिए केजीएमयू भेजा गया, लेकिन केजीएमयू में बड़ी पैथोलॉजी पर खून का नमूना जमा नहीं हो पाया। वहां काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों का कहना था कि जिस पर्चे पर मोहर लगी है,इस तरह का फार्मेट केजीएमयू में स्वीकार्य नहीं है। हिमांशु के मुताबिक केवल पर्चे के फार्मेट के लिए तीन बार बलरामपुर जाना पड़ा। इस दौरान बलरामपुर अस्पताल के सीनियर डॉक्टर ने बात की। इतना ही नहीं केजीएमयू के सीनियर डॉक्टरों से अपनी समस्या बताई तब जाकर जांच के लिए नमूना लिया गया। इस दौरान दोपहर से शाम हो गई, तब जाकर काम हुआ। बता दें कि कुछ जांचें बलरामपुर अस्पताल में नहीं हो पाती हैं, ऐसे में उन जांचों के लिए मरीज के केजीएमयू भेजा जाता है।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके.सिंह ने कहा कि इस तरह के मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन कोई निर्धारित फार्मेट की आवश्यकता जांच के लिए नहीं होती है, केवल सरकारी अस्पताल के चिकित्सक की मोहर ही पर्चे पर मान्य है।
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