कानपुर : नए टैरिफ की आहट से उत्पादन हुआ धीमा, 15 दिन तक बनी रह सकती है यह स्थिति

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Edited By Amrit Vichar
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प्रोडक्शन युनिट्स में 10 फीसदी तक धीमा हुआ उत्पादन

कानपुर, अमृत विचार। अमेरिका की ओर से भारत पर 5 सौ फीसदी टैरिफ लगाए जाने की बात की जा रही है। नए टैरिफ की आहट से निर्यात बाजार में हलचल है। हालात यह है कि नुकसान के डर से निर्यात युनिट्स में उत्पादन धीमा कर दिया गया है। युनिट्स में 10 फीसदी उत्पादन धीमा किए जाने क बाद निर्यातक 15 दिन का इंतजार करने की योजना बना रहे हैं। अमेरिका की ओर से भारत पर इससे पहले भी 50 फीसदी टैरिफ लगाया था। 

एक अनुमान के मुताबिक इस टैरिफ से शहर का लगभग 50 फीसदी कारोबार सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। इसके बाद जब अमेरिका के बाजार से टूट चुके निर्याक नए वैश्विक बाजार की ओर रुख कर रहे हैं ऐसे में अमेरिका की ओर से दूसरे टैरिफ की आहट शुरू हो गई। नए टैरिफ के बिल को अमेरिकी राष्ट्रपति के मंजूरी के बाद निर्यातकों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने प्रोडक्शन युनिट्स में उत्पादन के धीमें किए जाने का निर्णय लिया है।  

बातचीत का दौर शुरू

शहर में अमेरिका में सबसे अधिक लेदर व लेदर गुड्स का निर्यात होता है। लेदर सेक्टर के पास शहर से कुल निर्यात का लगभग 60 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में पूर्व में लगे टैरिफ से इस हिस्सेदारी का लगभग 50 फीसदी सीधे प्रभावित हुआ है। नए टैरिफ की हलचल भी सबसे अधिक इसी सेक्टर में है। नए टैरिफ के बिल के मंजूर होने के बाद निर्यातक व खरीदारों के बीच बातचीत का दौर शुरू हो गया है। इस बातचीत में आगे की रणनीति पर काम हो रहा है। 

कहीं तेज तो कहीं धीमा

नए टैरिफ पर शहर में दो तरफा काम हो रहा है। ऐसे निर्यातक जिनके पास काफी पहले के ऑर्डर है और ऑर्डर पूरा करने में 10 से 30 फीसदी उत्पादों को भेजा जाना है वे जल्द से जल्द पूरा ऑर्डर समय से पहले भेजने की योजना पर काम कर रहे हैं। जिससे स्थिति साफ होने तक भुगतान संबंधी पूरी प्रक्रिया खत्म किया जा सके। इससे उलट ऐेसे निर्यातक जिन्हें हाल ही में नए ऑर्डर मिले हैं वे प्रोडक्शन धीमा कर रहे हैं।  

पुराने टैरिफ ने ही कारोबार की कमर तोड़ दी है। अब नए टैरिफ की निर्यातक परेशान हैं। वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इस स्थितियों से किस तरह से निपटा जाए। फिलहाल वे इंतजार कर रहे हैं। यह भी उम्मींद जता रहे है कि आगे सब बेहतर होगा। फिलहाल निर्यातक किसी भी कारोबारी निर्णय के लिए15 से 20 दिनों का इंतजार कर रहे हैं... डॉ. जफर नफीस, निर्यातक। 

शहर का लेदर से जुड़ा ज्यादातर निर्यात कारोबार अमेरिका की बाजार से ही जुड़ा है। ऐसे में इतना अधिक टैरिफ यदि लगता है तो शहर का लेदर सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित होगा। नए ऑर्डर की तलाश में चमड़ा कारोबारियों को दूसरे देशों का रुाख करना होगा। यह आसान नहीं होगा। काफी कठिनाई का सामना करना होगा... मोहम्मद हसीमुद्दीन, निर्यातक।

टैरिफ से सबसे अधिक छोटे निर्यातकों को नुकसान होगा। बड़े निर्यातक फिर भी अपनी बाजार ख्याति से दूसरे मुल्कों से भी ऑर्डर भविष्य में हासिल कर सकते हैं। छोटे कारोबारी के लिए यह आसान नहीं होगा। छोटे निर्यातकों को नए बाजार के लिए बहुत पूंजी की जरूरत है। यह उनके पास काफी कम हैं... मोहम्मद अली, निर्यातक।

हम लोग पहले से ही नए बाजार की ओर रुख कर रहे हैं। नए बाजार में उत्पाद भेजना काफी मुश्किल का सौदा साबित हो रहा है। दूसरे मुल्क के खरीदार फिलहाल नए निर्यातकों से सीमित मात्रा में ही उत्पाद मंगा रहे हैं। इस मार्केट रिसर्च में काफी समय बर्बाद हो रहा है। अब लगता है कि नए सिरे से कारोबार कर रहे हैं... मोहम्मद साकिब, निर्यातक।

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