दरियाबाद: कभी परमिट का सहारा तो कभी चलता है चोरी छुपे आरा
अमृत विचार, दरियाबाद। क्षेत्र में हरे भरे पेड़ो पर जमकर आरा चलाया जा रहा है। कभी परमिट के सहारे तो कभी लकड़कट्टे चोरी छुपे पेड़ो को काट रहे हैं। दरियाबाद क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन की अनदेखी की जा रही है। धड़ल्ले से हरे पेड़ों के बाग उजाड़े जा रहे हैं। इसमें रक्षक ही भक्षक की …
अमृत विचार, दरियाबाद। क्षेत्र में हरे भरे पेड़ो पर जमकर आरा चलाया जा रहा है। कभी परमिट के सहारे तो कभी लकड़कट्टे चोरी छुपे पेड़ो को काट रहे हैं। दरियाबाद क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन की अनदेखी की जा रही है। धड़ल्ले से हरे पेड़ों के बाग उजाड़े जा रहे हैं। इसमें रक्षक ही भक्षक की भूमिका निभाते हैं तो कभी लकड़कट्टे चोरी छुपे पेड़ो को काटने से परहेज नही करते। वहीं वन विभाग ऐसे पेड़ों को भी काटने की अनुमति प्रदान कर रहे हैं जो हरा होने के साथ फलदार भी है।
ज्ञात हो कि दो दिन पूर्व दरियाबाद क्षेत्र के अलियाबाद में विभागीय मिली भगत से वन माफियाओं द्वारा हरे व फलदार एक दर्जन पेड़ो को काट दिया गया। आम के कलम बाग के पेड़ों को सूखा और पर्यावरण के लिये निष्प्रयोज्य दिखाकर पेड़ मालिक के नाम से परमिट जारी करा लिया जाता है।
उसके पश्चात वन माफिया उसी परमिट के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों को काटते हैं। इतना ही नहीं परमिट के नाम पर जहां पेड़ कटता है, उस स्थान पर नये पौधे लगाना नितांत आवश्यक होता है। लेकिन वन माफिया एक पेड़ का परमिट जारी कराने के बाद दर्जनों पेड़ उसकी आड़ में काटते हैं और उस स्थान पर नया पौधा भी नहीं लगाते हैं।
बुधवार को दरियाबाद कोतवाली क्षेत्र के उसरा गांव मे दरियाबाद निवासी कदीर नाम के लकड़कट्टे ने दो आम के पेड़ को चोरी छुपे काट कर गिरा दिए। इसके अतिरिक्त बगैर परमिट के भी पेड़ों को काटने की बात आम हो गयी है।
जब कभी पेड़ के कटने की बात प्रकाश में आती है तो वन विभाग मौके पर पहुंचकर जुर्माना की धनराशि वसूलकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाता है। जब इस विषय पर रामनगर रेंजर सुबोध शुक्ला से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी।
