Uttrakhand:आर्टिफीशियल इंटीलिजेंस बदलेगा ग्रामीण जल आपूर्ति, मिशन से जुड़ा ‘जल सूचक’ 

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

देहरादून। भारत में ग्रामीण जल सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में कदमताल करते हुए आर्ग्यम ने ‘जल सूचक’नामक डिजिटल प्लेटफार्म लॉन्च किया है। यह मंच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से जल आपूर्ति के डेटा को रियल-टाइम में प्रमाणित और उपयोगी बनाता है। यह ऐप पहले से ही असम में जल जीवन मिशन के साथ जुड़ चुका है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत अन्य बड़े राज्यों में भी इसके उपयोग की संभावना है। इसकी शुरुआत 20 अप्रैल को बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर में समाज सेविका रोहिणी नीलकणी ने की। 

दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति का संचालन अक्सर मैन्युअल प्रक्रियाओं पर आधारित होता है। पंप चालू करना, पानी की मात्रा दर्ज करना और रिकॉर्ड बनाए रखना—ये सभी कार्य जमीनी स्तर पर होते हैं। लेकिन इन जानकारियों का सही तरीके से सत्यापन न होने के कारण यह डेटा नीति निर्माण और मॉनिटरिंग में पूरी तरह उपयोगी नहीं बन पाता। जल सूचक इस समस्या को तकनीक के जरिए हल करता है।

इस ऐप के जरिए फील्ड पर काम करने वाले कर्मचारी मोबाइल ऐप से फोटो अपलोड करते हैं। एआई इन तस्वीरों को पढ़कर डेटा में बदल देता है। फिर सिस्टम तुरंत इसे सुरक्षित और सत्यापित रिकॉर्ड के रूप में दर्ज करता है। इससे डेटा में पारदर्शिता आती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और सटीक होती है। अब जल सूचक को एक ओपन प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जिसे विभिन्न राज्यों में आसानी से लागू किया जा सकता है। यह कई प्रकार के डेटा स्रोतों—जैसे नेट-डिवाइस, फ्लो मीटर, बिजली मीटर और मैन्युअल इनपुट से जानकारी ले सकता है। साथ ही, यह स्थानीय भाषाओं में काम करता है और ग्राम से लेकर राज्य स्तर तक डेटा को एकीकृत करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल न सिर्फ डेटा कलेक्शन का माध्यम है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि सरकार द्वारा जल क्षेत्र में किया गया निवेश आम लोगों तक बेहतर सेवाओं के रूप में पहुंचे। जल सूचक के माध्यम से अब जल मित्रों और फील्ड वर्कर्स के काम का डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध होगा, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

संबंधित समाचार