Bareilly:कामगार परदेस से लौटे मगर एचआईवी संक्रमण साथ लेकर
आसिफ अंसारी, अमृत विचार। रोजी-रोटी की तलाश में घर छोड़ बाहर जा रहे कामगार जाने-अंजाने बड़े खतरे की चपेट में आ रहे हैं। नासमझ कामगारों पर परदेस में एचआईवी संक्रमण झपट्टा मार रहा है और वे जानलेवा मुसीबत साथ लेकर अपने शहर-गांव लौट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग आंकड़े बरेली जिले की चिंताएं ज्यादा बढ़ाने वाले हैं।
मंडल में अभी तक सामने आए संक्रमित लोगों में आधे के करीब बरेली के ही निकले हैं। खतरे के लिहाज से बदायूं दूसरे, शाहजहांपुर तीसरे और पीलीभीत सबसे कम मरीजों के साथ चौथे नंबर पर दिखाई दे रहा है। 25 से 45 साल तक की उम्र वालों में सबसे अधिक संक्रमण प्रसार पाया गया है, जो नौजवानों के भटकाव का बड़ा संकेत माना जा सकता है।
मंडल का एंटीरेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर बरेली जिला अस्पताल में संचालित है, जहां एचआईवी संक्रमित लोग लगातार पहुंच रहे हैं। सेंटर के डाटा के अनुसार, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत में अभी तक एचआईवी पीड़ित मरीजों का आंकड़ा 7 हजार के पार पहुंच गया है, जो खासी चिंता का कारण है। काउंसलिंग में 85 फीसदी लोगों में एचआईवी संक्रमण की वजह असुरक्षित यौन संबंध सामने आए हैं। इसमें भी महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या कई गुना ज्यादा है। मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार ने ''अमृत विचार'' को बताया कि काउंसलिंग सेंटर में कई बच्चे भी संक्रमण का शिकार होकर पहुंचते दिखे हैं, जो नशे की लत के आदी थे और संक्रमित सुई से नश करने की वजह से दिक्कत में आ गए।
पुराने शहर में अधिक मामले आ रहे सामने
आंकड़ों के आइने में बरेली के अंदर पुराना शहर एरिया में काफी ज्यादा एचआईवी संक्रमित लोग होने की बात सामने आई है। इस लिहाज से तीन मोहल्ले बेहद संवेदनशील माने गए हैं, जहां के रहने वाले कितने ही लोग काम-धंधे की तलाश में दूसरे राज्यों में गए और वहां से संक्रमण साथ लेकर लौटे। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ऐसी संवेदनशील जगहों पर समय-समय कैंप लगाकर जांच की जा रही हैं। जांच में जो मरीज एचआईवी पीड़ित मिले उनका ऑनलाइन डाटा फीड करने के बाद इलाज के साथ निगरानी शुरु कर दी गई है।
खतरा शरीर में लेकर 150 से अधिक लापता
विशेषज्ञों का कहना है कि जांच के बाद अगर किसी मरीज में एचआईवी की पुष्टि होती है तो विभाग की तरफ से उसकी निगरानी की जाती है। जिला अस्पताल में बने एआरटी सेंटर में एचआईवी पीड़ित मरीजों की देखभाल, उपचार और मॉनीटरिंग जारी रहती है। मौजूदा समय में 150 से अधिक एचआईवी पीड़ित ऐसे मरीज हैं, जो सेंटर के रिकार्ड में तो हैं मगर काउंसलिंग व ट्रीटमेंट से गायब चल रहे हैं। ऐसे लोग समाज के लिए अधिक खतरा बन सकते हैं। टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं।
7015 मरीजों में पीलीभीत की संख्या सिर्फ 875
आंकड़ों में देखें तो 2012 से शुरू हुई निगरानी की प्रक्रिया में अभी तक बरेली मंडल के चार जिलों में 7015 एचआईवी संक्रमित लोग सामने आए। इनमें बरेली जिले में सबसे अधिक 3382, बदायूं में 1304, शाहजहांपुर में 978 और पीलीभीत के 875 निकले हैं। सभी मरीजों का एआरटी सेंटर में इलाज किया जा रहा है। सरकारी अस्पताल के अलावा कई निजी संगठन भी एचआईवी प्रभावित लोगों के इलाज व देखभाल में हाथ बंटा रहे हैं।
संक्रमण की वजह
- संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाना।
- इंजेक्शन से नशीली दवा लेने के दौरान।
- संक्रमित गर्भवती के गर्भस्थ शिशु को।
बचाव के उपाय
- यौन संबंध बनाने के दौरान कंडोम का प्रयोग।
- संक्रमित महिलाएं गर्भधारण से बचें।
- बगैर जांच किए गए रक्त चढ़ाने से बचें।
- नशीली दवा ले रहे व्यक्ति दूरी बनाकर रखे।
लक्षण
- गले या बगल में सूजन भरी गिल्टी
- लंबे समय तक बुखार का न उतरना
- वजन कम व जुकाम ठीक न होना
चिकित्सा अधिकारी एआरटी सेंटर डॉ. संजीव मिश्रा ने बताया कि मंडल में अब तक 7 हजार से अधिक मरीज एचआईवी के मिल चुके है। जिसमें सबसे अधिक बरेली के हैं। सभी मरीजों की निगरानी करके एआरटी सेंटर में उपचार किया जा रहा है। कई मरीज गायब भी हैं।
