अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस:फैमिली को वक्त देने से बढ़ेगी आपकी ताकत, सोशल मीडिया को न घोलने दें रिश्तों में जहर !
बरेली, अमृत विचार। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस की शुरुआत साल 1993 में की गई थी। जिसका मकसद परिवार की अहमियत और समाज में उसकी भूमिका को मजबूत करना था। साथ ही लोगों में परिवार के प्रति भावनात्मक लगाव पैदा किया जा सके। डिजिटल दौर ने एक घर में रहते हुए भी परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे से दूर कर दिया है। जिसका असर पारिवारिक रिश्तों पर भी दिखाई देने लगा है।
भारत जैसे देश में परिवार महज रिश्तों की कड़ी नहीं बल्कि संस्कार, सहयोग और भावनात्मक सुरक्षा का आधार माना जाता है। लिहाजा बदले दौर में परिवार और उसके रिश्तों की अहमियत को बचाना भी अब लोग जरूरी मानने लगे हैं। बरेली के सीबीगंज में रहने वाली नताशा गुप्ता का कहना है कि सोशल मीडिया और भागदौड़ भरी जिंदगी के दौर में लोग अपनों को समय देना भूलते जा रहे हैं। जबकि परिवार ही वह जगह है जहां हर परेशानी का समाधान और सुकून मिलता है। उनका मानना है कि रिश्तों में प्यार और विश्वास बनाए रखने के लिए परिवार के साथ समय बिताना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें मगर परिवार को भी समय देना चाहिए।
वहीं डेलापीर के रहने वाले शिक्षक आलोक सेठ के मुताबिक परिवार ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छे संस्कार और बुजुर्गों को सम्मान तभी मिल सकता है जब परिवार एकजुट रहे। उनका मानना है कि छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर रिश्तों को संभालना चाहिए। इज्जतनगर निवासी रोहित सक्सेना का कहना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में परिवार के साथ बैठकर बातचीत करने की आदत कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर परिवार के लोग दिन में कुछ समय भी साथ बैठें तो रिश्तों में अपनापन और मजबूती बनी रहती है।
