शैली: पारिवारिक फैंटेसी और भावनात्मक रहस्य

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Published By Anjali Singh
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शानदार, जानदार, अद्भुत और बेहद संवेदनशील — ऐसी फ़िल्में हर दशक में एक-दो ही बनती हैं। 8 मई 2026 को रिलीज़ हुई “Remarkably Bright Creatures” को मैंने बिना किसी खास उम्मीद के देखना शुरू किया था, लेकिन कुछ ही देर में एहसास हुआ कि मैं एक ऐसी फ़िल्म देख रहा हूँ जो सीधे दिल और आत्मा को छू जाती है। कई जगह यह अनुभव The Green Mile जैसी भावनात्मक गहराई का अहसास कराता है।

Shelby Van Pelt के चर्चित उपन्यास पर आधारित इस फ़िल्म में Sally Field, Lewis Pullman और Alfred Molina ने शानदार अभिनय किया है। कहानी सतह पर सरल लगती है, लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, भावनाओं और रहस्यों की परतें खुलती जाती हैं। फ़िल्म खत्म होने तक दर्शक लेखक और पूरी टीम की संवेदनशीलता को सलाम किए बिना नहीं रह पाते।

अकेलेपन, रिश्तों और मानवीय अपनत्व को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है। मित्रों और सहकर्मियों का स्नेह कहानी को बोझिल नहीं होने देता, बल्कि उसमें हल्की गर्माहट और मुस्कान बनाए रखता है। कई दृश्य इतने शांत लेकिन असरदार हैं कि लंबे समय तक याद रहते हैं। कहीं आँखें नम होती हैं तो कहीं चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। फ़िल्म का सबसे अनूठा पक्ष इसका ऑक्टोपस पात्र है, जो कहानी का सूत्रधार भी है। 

खास बात यह है कि इसे आजकल की फिल्मों की तरह पूरी तरह एआई से नहीं रचा गया, बल्कि वास्तविकता के साथ बेहद जीवंत ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यही वजह है कि उसका हर भाव दर्शकों तक सीधे पहुँचता है।  “Remarkably Bright Creatures” सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि भीतर तक उतर जाती है। 

कुछ फ़िल्में समय बिताने के लिए होती हैं, कुछ याद रह जाती हैं, और कुछ ऐसी होती हैं जो आत्मा में बस जाती हैं-यह फ़िल्म उन्हीं दुर्लभ फिल्मों में शामिल है। अगर आप इसे शांत माहौल और पूरे ध्यान से देखेंगे, तो संभव है फ़िल्म खत्म होने के बाद आपके मन में भी यही आए-अच्छा हुआ प्ले बटन दबा दिया। समीक्षक- मनोज अग्रवाल

 

 

 

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