अनोखी परंपरा : थाईलैंड का मंकी बुफे फेस्टिवल

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Published By Anjali Singh
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दुनिया के विभिन्न देशों में ऐसी अनेक परंपराएं और उत्सव मनाए जाते हैं, जो अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। इन्हीं में से एक है थाईलैंड का प्रसिद्ध मंकी बुफे फेस्टिवल, जो अपनी अनोखी अवधारणा के कारण विश्वभर में चर्चा का विषय बना रहता है। यह ऐसा उत्सव है, जिसमें इंसानों के लिए नहीं, बल्कि हजारों बंदरों के लिए भव्य भोज का आयोजन किया जाता है।

यह विशेष आयोजन थाईलैंड के लोपबुरी प्रांत में आयोजित किया जाता है, जो राजधानी बैंकॉक से लगभग 150 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। लोपबुरी को ‘मंकी सिटी’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मकाक प्रजाति के बंदर निवास करते हैं। स्थानीय लोगों के जीवन और पर्यटन उद्योग में इन बंदरों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। मंकी बुफे फेस्टिवल की शुरुआत वर्ष 1989 के आसपास स्थानीय व्यवसायी और होटल संचालक योंगयुथ कित्तवत्तनानुसोंट ने की थी।

उनका मानना था कि बंदरों की वजह से बड़ी संख्या में पर्यटक लोपबुरी आते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार को लाभ मिलता है। इसी विचार के तहत उन्होंने बंदरों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए उनके सम्मान में एक विशेष दावत का आयोजन शुरू किया। समय के साथ यह आयोजन एक बड़े वार्षिक उत्सव में बदल गया।

इस उत्सव के दौरान शहर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल फ्रा प्रांग साम योट मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों को रंग-बिरंगे फलों और सब्जियों से सजाया जाता है। बंदरों के लिए केले, तरबूज, अनानास, आम, अंगूर, ड्रैगन फ्रूट और अन्य फलों के विशाल ढेर लगाए जाते हैं। कई बार उनके लिए जेली, आइसक्रीम और विशेष मीठे व्यंजन भी तैयार किए जाते हैं। अनुमान है कि इस आयोजन में दो से तीन टन तक फल और खाद्य सामग्री इस्तेमाल की जाती है।

उत्सव का सबसे रोचक दृश्य तब देखने को मिलता है, जब हजारों बंदर एक साथ भोजन पर टूट पड़ते हैं। पर्यटक इस नजारे को कैमरों में कैद करने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। कई बार बंदरों की शरारतें भी लोगों का मनोरंजन करती हैं। वे खाने के साथ-साथ पर्यटकों के बैग, चश्मे या टोपी भी उठा लेते हैं, जिससे माहौल और भी दिलचस्प बन जाता है।

मंकी बुफे फेस्टिवल केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व का भी संदेश देता है। स्थानीय प्रशासन और नागरिक इस आयोजन के माध्यम से यह दर्शाने का प्रयास करते हैं कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता कितनी महत्वपूर्ण है।

आज यह उत्सव थाईलैंड की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है। हर वर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं। बंदरों के लिए आयोजित यह अनोखी दावत न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि कृतज्ञता और सह-अस्तित्व की भावना इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अन्य जीवों के प्रति भी उतनी ही आवश्यक है।