बढ़ती उम्र और कब्ज का चक्रव्यूह: जानें वृद्धावस्था में पेट साफ न होने के मुख्य कारण और इसका सटीक समाधान

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊः साठ-बासठ वर्ष की आयु के बाद अधिकांश लोगों को उम्र के प्रभाव का एहसास होने लगता है। पहले जैसी फुर्ती नहीं रहती, घुटने कमजोर पड़ने लगते हैं, दृष्टि कम होने लगती है और दांत भी जर्जर हो जाते हैं। कब्ज की समस्या बढ़ जाती है, पेट ठीक से साफ नहीं होता और शौचालय में अधिक समय बिताना पड़ता है। प्रोस्टेट बढ़ने से पेशाब की धार कमजोर हो जाती है तथा जलन और संक्रमण की शिकायत होने लगती है। कई लोगों को चलते समय चक्कर आते हैं। गर्दन की हड्डियों में बदलाव के कारण मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसके साथ कमर, गर्दन और बाजुओं में दर्द भी सामान्य हो जाता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

कहां है समस्याओं की जड़

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इन नई परेशानियों के अतिरिक्त उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, अल्सर या अन्य रोगों के लिए व्यक्ति पहले से ही उपचार ले रहा होता है। दिनभर में कई दवाइयां भी खानी पड़ती हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि कब्ज, पेशाब की शिकायत और जोड़ों के दर्द के पीछे मुख्य कारण क्या है? ध्यान से देखने पर स्पष्ट होता है कि इनमें से अधिकांश समस्याएं हमारी खराब जीवनशैली से जुड़ी हैं। यह जीवनशैली किशोरावस्था से प्रारंभ होकर युवावस्था और प्रौढ़ावस्था तक चलती रहती है। प्रारंभ में शरीर किसी प्रकार इसे सहन कर लेता है, लेकिन समय के साथ विभिन्न अंगों के कल-पुर्जे घिसने लगते हैं। उनमें सूजन, दाह और प्रदाह उत्पन्न होता है। झिल्लियों पर घाव बनने लगते हैं और उनके ऊपर साइटोकाइन तथा कोलेस्ट्रॉल जैसे विजातीय पदार्थ जमा होने लगते हैं। लगातार टूट-फूट और प्रदाह के कारण बड़ी आंत, मल-पथ, मूत्र-पथ तथा हड्डियों के जोड़ अपनी कार्यक्षमता खोने लगते हैं। बड़ी आंत से मल निकलने की प्रक्रिया शिथिल पड़ जाती है। प्रोस्टेट वृद्धि के कारण मूत्र-पथ में अवरोध होने लगता है, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। जोड़ों की क्षमता भी कम होने लगती है और उन्हें सहारे की आवश्यकता महसूस होने लगती है।

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क्या हैं परेशानियां

इस उम्र में चलने की रफ्तार तथा घुटनों की समस्या के अतिरिक्त शरीर के अन्य भागों में भी अनेक प्रकार की परेशानियां घेर लेती हैं। ये वे शिकायतें होती हैं, जो पहले भी थोड़ी-बहुत थीं, लेकिन काम के बोझ के चलते उतनी अनुभव नहीं होती थीं। अब जब व्यक्ति अपेक्षाकृत खाली रहता है और घर तक सीमित हो जाता है, तो ये समस्याएं अधिक बढ़ी हुई प्रतीत होती हैं।

एक मुसीबत हो, तो उससे निपटा जा सकता है, लेकिन जब कब्ज, पेशाब में जलन और घुटनों-कमर का दर्द एक साथ घेर लें, तो सामान्य जीवन दूभर हो जाता है। इन बीमारियों का ऐसा चक्रव्यूह बन जाता है कि व्यक्ति न ठीक से चल सकता है, न घूम-फिर सकता है। सुनने में ये शिकायतें साधारण लगती हैं, परंतु बढ़ती उम्र में जीवन की गुणवत्ता पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है। मन का उत्साह, ऊर्जा और आनंद प्रभावित हो जाते हैं।

प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं

  • पेट साफ न होना (कब्ज)
  • मूत्र-पथ में बार-बार संक्रमण तथा प्रोस्टेट वृद्धि
  • जोड़ों में दर्द, विशेषकर कमर, गर्दन और घुटनों में
  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
  • मधुमेह (डायबिटीज)
  • हृदय रोग एवं हृदयाघात
  • पक्षाघात (लकवा)
  • सांस और खांसी की समस्याएं
  • विभिन्न प्रकार के कैंसर- पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट एवं मुख कैंसर तथा महिलाओं में स्तन, गर्भाशय और गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर
  • अवसाद, स्मृति-हृास एवं डिप्रेशन
  • श्रवण, दृष्टि एवं दंत संबंधी रोग

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कब्ज और प्रोस्टेट का संबंध

कब्ज तथा प्रोस्टेट की समस्या अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी हुई प्रतीत होती है, जब मल बड़ी आंत में जमा रहता है और बाहर नहीं निकलता, तो व्यक्ति को ऐसा लगता है मानो वह मैले-कचरे का बोझ लेकर चल रहा हो। जमा मल से उत्पन्न सड़ांध और हानिकारक जीवाणु आसपास के अंगों, विशेषकर यकृत (जिगर), को प्रभावित कर सकते हैं। कब्ज में मल निकालने के लिए पेट पर जोर लगाना पड़ता है। इससे प्रोस्टेट पर भी दबाव पड़ता है और वह मूत्र-पथ का रास्ता और अधिक अवरुद्ध कर सकता है। कई बार लोग विभिन्न प्रकार की दवाइयों, एनिमा अथवा अन्य उपायों का सहारा लेते हैं। कुछ लोग तो गुदाशय में अंगुली डालकर सूखे एवं कठोर मल को निकालने का प्रयास करते हैं, जिसे कुछ लोग “गणेश क्रिया” भी कहते हैं।

कब्ज के प्रमुख कारण

यह स्थिति इसलिए उत्पन्न होती है, क्योंकि वर्षों से हमारा खान-पान बिगड़ चुका होता है। इसके प्रमुख कारण हैं-
 

  • जंक फूड का अत्यधिक सेवन
  • भोजन में रेशे (फाइबर) की कमी
  • फल और सब्जियों का अभाव
  • पर्याप्त शारीरिक गतिविधि का अभाव
  • अनियमित दिनचर्या
  • लंबे समय से डायबिटीज
  • थायरॉयड की कमी
  • कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव
  • चलने-फिरने में कमी

ये सभी कारण मिलकर बड़ी आंत की मांसपेशियों की सक्रियता कम कर देते हैं, जिससे मल आगे नहीं बढ़ पाता और सूखकर कठोर गांठों का रूप ले लेता है।

वृद्ध लोगों में कब्ज अत्यंत कष्टदायक समस्या होती है। अनेक प्रकार की बाजारू दवाइयों और उपचारों के बावजूद पेट साफ न होने की शिकायत बनी रहती है। वृद्धावस्था में जब प्रोस्टेट वृद्धि या हृदय रोग जैसी समस्याएं भी साथ हों, तब मल त्याग के लिए अत्यधिक जोर लगाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इससे हृदयाघात जैसी आपात स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

कहा गया है— “कोष्ठ अमल हो, दिल निर्मल हो, बुद्धि विमल हो, आयु प्रबल हो।”  अर्थात पेट साफ हो, हृदय की धमनियां स्वच्छ हों और बुद्धि ईर्ष्या-द्वेष जैसे विकारों से मुक्त हो, तो जीवन अधिक स्वस्थ और दीर्घायु बनता है।

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बचाव के उपाय

  • नियमित रूप से टहलें।
  • फल एवं रेशेदार सब्जियों का सेवन करें।
  • मैदा एवं जंक फूड से परहेज करें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • समय पर शौच जाने की आदत डालें।
  • नैसर्गिक वेगों को न रोकें।

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