हवाला नेटवर्क का खुलासा: साल भर में 1500 ट्रांजेक्शन और 4.50 करोड़ इधर से उधर, दो आरोपियों से 35 लाख बरामद
देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था हवाला नेटवर्क, दिल्ली के दो कारोबारी भी पुलिस के रडार पर
बरेली पुलिस ने रविवार को बड़े हवाला रैकेट का खुलासा किया। हवाला कारोबार से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ इनके पास से 35 लाख नकद बरामद किया गया। पुलिस को पकड़े गए आरोपियों के पास से फर्जी आधार कार्ड भी मिले। देश के कई राज्यों तक हवाला नेटवर्क फैला हुआ था। पुलिस को इनकी भनक उस वक्त लगी जब फर्जी कंपनी के बैंक खाते में 1500 के आसपास ट्रांजेक्शन कर उसमें 4.50 करोड़ रुपये आने का मामला पकड़ में आया।
बरेली, अमृत विचार। बरेली पुलिस ने रविवार को बड़े हवाला रैकेट का खुलासा किया। हवाला कारोबार से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ इनके पास से 35 लाख नकद बरामद किया गया। पुलिस को पकड़े गए आरोपियों के पास से फर्जी आधार कार्ड भी मिले। देश के कई राज्यों तक हवाला नेटवर्क फैला हुआ था। पुलिस को इनकी भनक उस वक्त लगी जब फर्जी कंपनी के बैंक खाते में 1500 के आसपास ट्रांजेक्शन कर उसमें 4.50 करोड़ रुपये आने का मामला पकड़ में आया।
बंद कंपनी की आड़ में हवाला कारोबार
दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि केजीएन नाम की कंपनी की लंबे समय से बंद है। मगर इसके नाम पर बैंक खाते अभी तक सक्रिय हैं। जिनके जरिए बड़े पैमाने पर रकम ट्रांसफर कर हवाला के तहत अलग-अलग लोगों तक पहुंचाई जा रही है। सूचना के बाद पुलिस ने माधोबाड़ी इलाके में छापा माराकर दो लोगों जगदीश चोटियां निवासी माधोबाड़ी, थाना बारादरी व जमीर अहमद निवासी हजियापुर चुंगी, थाना बारादरी को गिरफ्तार किया गया। जिनके पास से 35 लाख की नकदी और दो फर्जी आधार कार्ड व चार मोबाइल बरामद किए गए।
जहीर ने मोईन के नाम से खोला फर्जी खाता
पकड़े गए आरोपी जमीर अहमद ने पुलिस को बताया कि व्हॉट्सएप पर उसका संपर्क खुद को दुबई निवासी बताने वाले जीशान अली नाम के शख्स से हुआ था। जिसके कहने पर अपने भाई मोईन अली के नाम से फर्जी कंपनी व बैंक खाता खुलवाया गया। इन खातों में अलग-अलग स्त्रोतों से रकम प्राप्त होती थी। इन खातों से रकम निकालकर हवाला नेटवर्क के जरिए टोकन धारकों तक पहुंचाया जाता था। बदले में आरोपियों को कमीशन मिलता था।
जगदीश करता था पैसा इधर से उधर
आरोपी जगदीश चोटियां के मुताबिक वह पिछले करीब चार सालों से हवाला का कारोबार कर रहा है। कमीशन लेकर पैसा एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उसकी थी। हवाला नेटवर्क के जरिए पैसा भेजने वालों की पहचान गुप्त रखी जाती है। सिर्फ टोकन के आधार पर रकम का लेन-देन होता है। पूछताछ में जीशान अली, मोईन अली, लालचंद्र व धम्माराम के नाम सामने आए। पुलिस इनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
दिल्ली के व्यापारियों को पहुंचाई रकम
एसएसपी अनुराग आर्या ने बताया कि मई-2025 में केजीएन नाम से फर्जी कंपनी आरोपियों ने बनाई थी। कंपनी के नाम से बने बैंक खाते से पिछले एक साल में 1500 के आसपास ट्रांजेक्शन किए गए। जिसमें 4.50 करोड़ की धनराशि ऐसी है जो इनके खातों में आई है। जितना भी पैसा है उसको नकद बैंक में डाला गया था। फर्जी कंपनी के खाते से रकम आरोपियों के खातों में आई, जिसको भी आरोपियों ने नकद बैंक से निकाला। नकद निकालने के बाद दिल्ली के चांदनी चौक में दो व्यापारियों के पास जमा किया गया।
देश के कई राज्यों तक फैला हवाला नेटवर्क
एसएसपी ने बताया कि जीशान अली पूरे मामले में वांछित है, उसने आरोपियों को इस काम में लगाया था। पैसा किन-किन लोगों को पास पहुंचा और किन गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ व दिल्ली के व्यापारियों की क्या भूमिका रही इसको लेकर जांच की जाएगी। स्पेशल टीम का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों तक इनका नेटवर्क फैला हुआ है, जिसमें बिहार, पश्चिम बंगाल, असम जैसे राज्यों से कैश बैंक खातों में डाला गया है, जिसको आरोपियों ने निकालकर हवाला के जरिए इधर से उधर किया।
