Bareilly News: पशमीना शॉल का धंधा धोखा, जमीर ब्रदर्स का असली काम था हवाला कारोबार

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली में शातिर भाइयों ने कुछ ही महीने में दिल्ली पहुंचाए 4.50 करोड़ रुपये, जांच में 1500 से अधिक बैंक ट्रांजिक्शन का खुलासा

बरेली, अमृत विचार। हवाला रैकेट के मामले में बरेली से गिरफ्तार जरी कारोबारी जमीर अहमद और उसके भाई मोईन अली के तार कश्मीर घाटी के साथ दुबई से जुड़े सामने आए हैं। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि पशमीना शॉल का धंधा करने जमीर ब्रदर्स का कश्मीर घाटी में आना जाना रहता था। वहीं से उनका ऑनलाइन कनेक्शन दुबई के बताए जा रहे अली जीशान से जुड़ा, जिसके बाद वे हवाला नेटवर्क का हिस्सा बन गए।

4 करोड़ से ज्यादा दिल्ली में खपाया
पुलिस के अनुसार, सिर्फ एक साल के अंदर ही जमीर ब्रदर्स हवाला की साढ़े 4 करोड़ से अधिक की रकम राजधानी दिल्ली में खपा चुके थे। बरेली में थाना बारादरी क्षेत्र के रहने वाले जमीर अहमद व उसका तहेरा भाई मोईन अली काफी समय से दिखावे को कश्मीर जाकर शॉल, रुमाल और कारचोबी का काम करते नजर आते थे मगर उनका असली खेल हवाला कारोबार से जुड़ा था। कश्मीर में उनका सोशल मीडिया के जरिए संपर्क दुबई निवासी बताने वाले अली जीशान से हुआ था। जीशान ने उनको हवाला नेटवर्क से जोड़ा, जिसके बाद आरोपी जमीर ब्रदर्स ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

साल भर में 1500 ट्रांजेक्शन 
पुलिस की छानबीन में पता लगा है कि उनकी बोगस फर्म के खाते में विभिन्न राज्यों से बड़ी मात्रा में धनराशि जमा कराई जाती थी। शुरूआती जांच में असम, मेघालय और भूटान सीमा से सटे इलाकों के अलावा कई प्रदेशों में रकम के आदान-प्रदान की जानकारी भी सामने आई है। व्हाट्सएप पर प्राप्त टोकन नंबर के आधार पर यह धनराशि दिल्ली के कारोबारियों तक पहुंचाई जाती थी। पिछले एक वर्ष के दौरान कंपनी के बैंक खातों में करीब 1500 ट्रांजेक्शन हुए। इतनी बड़ी संख्या में लेनदेन होने के बावजूद बैंक स्तर पर कोई संदेह नहीं जताया गया। पुलिस अब बैंक खातों के संचालन, धन के स्रोत और लेनदेन के पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

चोटिया शिकंजे में, कारोबारी धम्माराम-लालचंद की तलाश
पूछताछ में पता लगा है कि गिरफ्तार आरोपी जगदीश चोटिया रैकेट का अहम हिस्सा था। वह बरेली में कैश जमा करता था और दिल्ली में खास जगहों पर पैसा पहुंचाता था। पहचान के लिए कैश देने वाले को टोकन के रूप में फटे नोट का आधा हिस्सा व्हाटएसप पर भेजा जाता था। उसी को दिखाकर दिल्ली में रकम का आदान-प्रदान किया जाता था। पहचान गोपनीय रखी जाती थी। पुलिस का दावा है कि नेटवर्क के तार दिल्ली के कारोबारी धम्माराम और लालचंद से भी जुड़े हैं। दोनों फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है। 

मोईन अली पर कसेगा शिकंजा
मोईन अली पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए भी पुलिस ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। जांच में पता चला है कि जमीर ब्रदर्स ने बोगस फर्म बनाकर हवाला रुपयों को इधर से उधर करने के लिए इस्तेमाल किया। जबकि जांच में पता चला है कि फर्म ने एक रुपये की भी जीएसटी नहीं दी है। पुलिस का मानना है कि इस तरह की और भी बोगस फर्म होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसियों अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि ये रुपया किस काम में इस्तेमाल किया जाना था। जिसे एक साल से लगातार हवाला के माध्यम से भेजा जा रहा था।एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि दुबई कनेक्शन, फंडिंग के स्रोत और धन के अंतिम उपयोग की गहन जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।

10 प्रतिशत का मिलता था कमीशन
पूछताछ में समाने आया है कि हवाला के रुपयों को बरेली से दिल्ली तक पहुंचाने के लिए 10 प्रतिशत का कमीशन दिया जाता था। इस मोटे कमीशन के चक्कर में गैंग के तमाम लोग काम कर रहे थे। जगदीश चोटिया ने बताया कि वह भी कमीशन के चक्कर में आरोपियों से जुड़ा था। जगदीश चोटिया मूल रूप से नकोदेशर थाना कालू तहसील लूनकरसर जिला बीकानेर राजस्थान का रहने वाला है।

अली जीशान को देखा किसी ने नहीं, संपर्क में सभी

अली जीशान का चेहरा किसी ने नहीं देखा है। वह जमीर ब्रदर्स को फेसबुक के माध्यम से मिला था। उसने जमीन को यह तो बताया कि दिल्ली हवाला का रुपया पहुंचना है लेकिन उन रुपयों का प्रयोग किस काम में किया जाना है। इसकी जानकारी किसी को नहीं है। पुलिस का मानना है जरुरी नहीं है कि अली जीशान दुबई में रह रहा हो। वह भारत में रहकर भी यह काम सकता है। पुलिस की टीम सर्विलांस के माध्यम से अली जीशान की तलाश कर रही है।

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