अयोध्या को बहुत याद आ रहे परमहंस और सिंघल, राम मंदिर आंदोलन के थे नायक, लिप्सा से दूर थे दोनों
अयोध्या के लोगों को इन दिनों राम मंदिर आंदोलन के नायक महंत राम चंद्र दास परमहंस और अशोक सिंघल बहुत याद आ रहे हैं। वर्तमान दौर में जब राम मंदिर के चढ़ावे की राशि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे समय में दोनों के अनुशासन की नजीर दी जा रही है।आंदोलन के यह दोनों चेहरे एक-दूसरे के पूरक थे।
राजेंद्र कुमार पांडेय/अयोध्या,अमृत विचार : अयोध्या के लोगों को इन दिनों राम मंदिर आंदोलन के नायक महंत राम चंद्र दास परमहंस और अशोक सिंघल बहुत याद आ रहे हैं। वर्तमान दौर में जब राम मंदिर के चढ़ावे की राशि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे समय में दोनों के अनुशासन की नजीर दी जा रही है।आंदोलन के यह दोनों चेहरे एक-दूसरे के पूरक थे।
तत्कालीन विहिप कार्याध्यक्ष अशोक सिंघल देश के संतों के साथ समाज को एक जुट करने का काम करते थे, तो श्री दिगंबर अखाड़ा के महंत राम चंद्र दास परमहंस उसके नेतृत्वकर्ता हुआ करते थे। संघर्ष के दिनों में तय कार्यक्रम से जरा सा इधर-इधर होने पर परमहंस अनुशासन की ऐसी लकीर खींचते थे कि लोगों की घिग्घी बंध जाती थी। कई और लोग भी थे जिनका नेतृत्व आंदोलनकारियों को मिला। इनमें गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ, महंत नृत्य गोपाल दास, विश्वेश तीर्थ, परमानंद जी महराज, साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती आदि के साथ कई बड़े संतों की एकजुटता और निस्वार्थ सेवा चर्चा में रहती है, लेकिन केंद्र में यही दो थे।
पूर्व सांसद और आंदोलन के फायर ब्रांड नेता विनय कटियार आज जो कुछ कह रहे हैं वह उनके अंदर की पीड़ा भी है। आंदोलन में रहे हैं, देखा है इसलिए वह अपने को रोक नहीं पा रहे हैं। आंदोलन में सब कुछ न्योछावर करने का जज्बा इन भविष्य का आंकलन करने वाले नेताओं में तो था ही, ईमानदार भी उतने ही थे। आज के परिवेश में तुलना अब आम लोग कर रहे हैं। अनुशासन ऐसा था कि परमंहस ने शिलादान के लिए जो कहा तो फिर पीछे नहीं हटे। लक्ष्य के प्रति ईमानदार इतने की बदलाव की चर्चा आई तो मंदिर छोड़ पत्थर तराशी स्थल पर ही हवन पूजन शुरू कर दिया। जेब में दान का पैसा आया तो जो भी जरूरतमंद सामने दिखा जेब खाली कर दी, बांट दिया। खिलाया-पिलाया भी।
लोग कहते हैं कि यह दोनों लोग होते तो आज चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी को लेकर एसआईटी की नौबत ही न आती। ऐसी चर्चा आने के पहले ही दोनों इसका निस्तारण कर चुके होते। अयोध्या में तोड़-फोड़ और स्याह पक्ष नहीं आता। कहते हैं जहां भी उनकी आत्माएं होंगी। अपनी अगली पीढ़ी के कर्मों पर दुखी तो होंगी ही, मौन धारण कर लिया होगा। आराध्य राम लला से हिसाब बराबर करने की शायद प्रार्थना कर रहे होंगे।
