लखनऊ: CM योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट को सिंचाई विभाग ने बताया अवैध, मुख्तार की जमीन पर बने थे 72 फ्लैट, नोटिस चस्पा
लखनऊ, अमृत विचार। राजधानी लखनऊ में सात महीने पहली यूपी सरकार ने जिन 72 फ्लैटों को गरीबों को दिए थे, उन्हें सिंचाई विभाग ने अवैध बता दिए।गुरुवार को सिंचाई विभाग ने योजना के एक फ्लैट पर नोटिस चस्पा किया है पर उसे विभाग की जमीन पर बना अवैध निर्माण बताते हुए सात दिन के भीतर कब्जा हटाने की बात कही है। वहीं नोटिस लगने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और आसपास रहने वाले लोगों ने विभागीय कार्रवाई का विरोध भी किया।
सिंचाई विभाग का दावा- जमीन पर हुआ अवैध निर्माण
डालीबाग स्थित सरदार पटेल आवासीय योजना में गुरुवार को सिंचाई विभाग की टीम पहुंची और सबसे अंतिम छोर पर बने एक फ्लैट की दीवार पर नोटिस चिपका दिया। नोटिस में कहा गया है कि संबंधित निर्माण सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध रूप से किया गया है। विभाग ने सात दिन के भीतर कब्जा हटाने के बात कही और चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा के बाद विभाग स्वयं कार्रवाई करेगा। यदि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होगी। इतना ही नहीं उनसे हर्जा-खर्चा और समन शुल्क भी वसूला जाएगा।

मुख्तार अंसारी के कब्जे से मुक्त कराई गई थी जमीन
यह वही जमीन है, जिसे पहले माफिया मुख्तार अंसारी के अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया था। करीब 2314 वर्गमीटर क्षेत्रफल की इस भूमि पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए सरदार पटेल आवासीय योजना विकसित की थी। यहां ग्राउंड प्लस थ्री संरचना वाले तीन ब्लॉक बनाकर कुल 72 फ्लैट तैयार किए गए। प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 36.65 वर्गमीटर रखा गया और इसकी कीमत करीब 10.70 लाख रुपये तय की गई थी।

मुख्यमंत्री योगी ने खुद सौंपी थी चाबियां
इस योजना के लिए अक्टूबर-नवंबर 2025 के दौरान ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे, जिसमें करीब आठ हजार लोगों ने पंजीकरण कराया था। लॉटरी प्रक्रिया के जरिए 72 पात्र आवेदकों का चयन किया गया। 4 नवंबर 2025 को सरदार पटेल जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद लाभार्थियों को फ्लैट की चाबियां सौंपी थीं। उस समय मुख्यमंत्री ने कहा था कि माफियाओं से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के घर बनाना सरकार की प्राथमिकता है और यह प्रदेश में कानून के राज का प्रतीक है।
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नोटिस के बाद एक्शन शुरू, लोगों ने किया विरोध
सिंचाई विभाग की टीम ने सिर्फ फ्लैटों पर ही नहीं, बल्कि आसपास बने मकानों और झोपड़ियों पर भी नोटिस लगाए। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग बुलडोजर और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा था और कुछ निर्माणों को गिराने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई। हालांकि विरोध बढ़ने पर अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा। इस दौरान कुछ मकानों को नुकसान पहुंचने की भी बात सामने आई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरदार पटेल आवासीय योजना मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना है। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस पर किसी व्यक्ति का नाम तक नहीं लिखा गया और गरीबों के घरों पर सीधे कार्रवाई शुरू कर दी गई।

नोटिस पर पेंट कराकर हटाया गया
सिंचाई विभाग की कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद एलडीए की ओर से निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार के लोग भी मौके पर पहुंच गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने फ्लैट पर चस्पा किए गए नोटिस के ऊपर पेंट कराकर उसे ढकवा दिया।फिलहाल योजना के अधिकांश फ्लैट खाली पड़े हैं और यहां कोई रह नहीं रहा है। 72 आवंटियों में से दो लोगों का आवंटन किस्त जमा न करने के कारण रद्द हो चुका है। इन दो फ्लैटों के लिए एलडीए ने दोबारा आवेदन प्रक्रिया शुरू की है, जिसके तहत 5 जून से 20 जून तक ऑनलाइन पंजीकरण किए जा रहे हैं। वहीं, सिंचाई विभाग और एलडीए के बीच जमीन को लेकर पैदा हुए इस विवाद ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
