50 साल बाद का सिक्किम
भारत के पूर्वोत्तर में स्थित हिमालयी प्रदेश सिक्किम को आज जब हम उसके उदय के पचासवें साल में देखते हैं, तो यह बहुत बदला हुआ और पहले की अपेक्षा काफी मनमोहक सा दिखता है। इसकी राजधानी गंगटोक देखा जाए, तो भारत के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है। इसकी खूबसूरती शहर के किसी एक छोर से नहीं आंकी जा सकती, जीरो प्वाइंट होते हुए शहर के किसी भी कोने तक जाइए, मन मुग्ध हो जाता है। ऊंची-नीची पहाड़ियों पर बसा यह शहर स्मार्ट सिटी के स्वरूप जैसा तेजी से विकसित हो रहा है।
खूबसूरती के साथ आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन
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मई 2025 से अप्रैल 2026 तक सिक्किम के 50 वीं वर्षगांठ को स्वर्ण जयंती के रूप मनाया गया। अप्रैल 2026 में गंगटोक में इसका समापन समारोह पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस समापन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी। निःसंदेह भारत के भीतर जब हम किसी खूबसूरत पर्वतीय शहर की कल्पना करते हैं, तो सिक्किम की राजधानी गंगटोक हमारे आंखों के सामने होता है। कदम-कदम पर यहां की वादियां हमें अपनी ओर खींचती है।
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गंगटोक में पिछले दो चार सालों में टैक्सियों में बेतहाशा इजाफा को देखते हुए कहा जा सकता है कि यहां पर्यटकों की आवाजाही में खूब बढ़ोतरी हुई है। पर्यटक ही यहां के लोगों की मुस्कान है। भारत के तकरीबन हर शहर से लोग यहां आते हैं। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में यहां होटल मिलना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि न्यू ईयर सेलीब्रेट करने वालों की यही भारी भीड़ जमा हो जाती है। यहां आने के लिए यूं तो कोई खास समय तय नहीं है, लेकिन अप्रैल से जून तक यहां की चहल-पहल देखने लायक होती है।
यहां रोजगार की बड़ी उम्मीदें भले न हों, लेकिन सूबे की सरकार की हर परिवार में एक नौकरी की कल्याणकारी योजना के चलते खुशहाली आपको हर चेहरे पर झलकती हुई दिखेगी। उद्योग के नाम पर यहां दवाओं और एल्कोहल की फैक्ट्रियां जरूर है, लेकिन यह अपेक्षाकृत रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता नहीं रखती। पर्यटन के बाद चाय उद्योग इस प्रदेश की आर्थिक आय का दूसरा बड़ा माध्यम है। सुदूर पहाड़ पर स्थित टीमी टी गार्डन यहां सबसे बड़ा चाय बागान है। खूबसूरती के साथ आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन क्या होता है, यहां आकर जाना जा सकता है। स्वच्छता के लिए बिना कोई बड़ा होर्डिंग अथवा प्रचार-प्रसार के किसी सुंदरता को देखना हो गंगटोक जरूर देखें। गंदगी के नाम पर सड़कों पर एक तिनका भी नजर नहीं आएगा।
भारत का नेपाल
2011 की जनगणना के अनुसार करीब साढ़े छः लाख की आबादी वाला यह प्रदेश भारत के सबसे छोटे राज्यों में से एक है। छः जिला और मात्र 32 विधायकों की संख्या वाला यह प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश है। प्रस्तावित दो जिलों के और बन जाने से जिलों की संख्या आठ हो जाएगी। यहां लोकसभा के लिए एक और राज्यसभा के लिए भी एक सदस्य निर्वाचित होते हैं।
सिक्किम के उत्तर और उत्तरपूर्व में चीन का बार्डर है। गंगटोक से चीन का बार्डर नाथूला करीब 58 किमी की दूरी पर है। यहां कश्मीर के गुलमर्ग की तरह बर्फबारी हमेशा होती रहती है। गंगटोक आने वाले पर्यटक बर्फबारी का आनंद लेने नाथुला बार्डर जरूर जाना चाहते हैं।14,500 फिट की ऊंचाई वाले इस दर्रे तक आने के लिए विशेष परमिट की जरूरत पड़ती है। अधिक उम्र वालों को यहां आक्सीजन की समस्या से जूझना पड़ता है। गंगटोक के दक्षिण पूर्व में भूटान , दक्षिण में पश्चिम बंगाल और पश्चिम में नेपाल स्थित है। सिक्किम के लोग नेपाली जैसे ही हैं, यूं तो यहां हिंदी भी बोली जाती है, लेकिन नेपाली भाषा ही चलन में है। सिक्किम को भारत का नेपाल कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा। नेपाल की तरह ही यहां लेपचा, भूटिया, मतांग, गुरुंग आदि जातियों की बाहुल्यता है। यह प्रदेश बौद्ध संस्कृति और विविध समुदायों के बीच मजबूत भाईचारे के लिए जाना जाता है।
1976 में बना भारतीय संघ का हिस्सा
1975 के पहले सिक्किम नामग्याल वंश के राजाओं के कब्जे में था। 1973 में सिक्किम की जनता ने राजशाही के खिलाफ भारी विद्रोह कर दिया। 1975 में जनमत संग्रह हुआ तो 97 प्रतिशत से अधिक लोगों ने भारत में विलय की इच्छा जाहिर की। इस तरह 1976 में सिक्किम भारतीय संघ का हिस्सा बना। 50 वर्ष पूर्व सिक्किम न तो खुशहाल था और न ही खूबसूरत। गरीबी और विपन्नता से घिरा हुआ यह पहाड़ी क्षेत्र बेतरतीब और बिखरा हुआ था। भारत का हिस्सा बनने के बाद यहां का जीवन नए सिरे से प्रारंभ होना शुरू हुआ। सिक्किम प्रदेश की करीब 60 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्मावलंबी है।।
यहां पहुंचने के लिए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से सड़क मार्ग से ही आना पड़ता है। सड़क मार्ग नेपाल के तीस्ता नदी के किनारे होते हुए काफी दूरी तक रोमांचकारी यात्रा का बोध कराती है। रेलवे लाइन बिछाने का काम भी तेजी से चल रहा है, लेकिन इसे पूरा होने में अभी तीन चार साल तक लग सकते हैं। रेलवे लाइन का काम पूरा हो पाया, तो गंगटोक से 36 किमी पहले रोम्पू तक ही रेलवे स्टेशन का विस्तार हो पाएगा। यहां से गंगटोक आने के लिए फिर भी 36 किमी सड़क मार्ग से ही आना होगा। अभी सिलीगुड़ी से करीब सवा सौ किमी घुमावदार पहाड़ी मार्ग से होकर गंगटोक तक पहुंचना पड़ता है। गंगटोक शहर के प्रमुख और दर्शनीय स्थलों में एमजी मार्ग, ताशी व्यू प्वाइंट, तस्मगो झील, हनुमान टोक, गणेश टोक, बनझाकरी झील आदि शामिल हैं। गंगटोक का एमजी मार्ग इस शहर का सबसे आकर्षक और सुंदर जगह है। यहां महात्मा गांधी की लगी मूर्तियां इस बात की शहादत है कि उनकी अहिंसावादी सोच ही थी कि सिक्किम के लोगों को भारत में विलय को प्रेरित किया।
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