लखनऊ में 24 जून को 17 महापौरों का महामंथन, सौंपना होगा शहरों की हकीकत का 'रिपोर्ट कार्ड'

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Published By Muskan Dixit
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विकास कार्यों का ब्योरा न देने वाले निकायों पर 'संशोधन अधिनियम 2025' के तहत होगी कार्रवाई

लखनऊः उत्तर प्रदेश के नगर निगमों को अधिक सशक्त और हाईटेक बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों के इलाकों की ज़मीनी हकीकत अब वहां के महापौरों (मेयर्स) के रिपोर्ट कार्ड से तय होगी। आगामी 24 जून को राजधानी लखनऊ में एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रदेश के सभी 17 महापौर शामिल होकर शहरों के विकास और व्यवस्थाओं पर मंथन करेंगे।

महापौरों को भेजा गया प्रोफार्मा, देना होगा पाई-पाई का हिसाब

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस बैठक के लिए सभी महापौरों को एक विशेष प्रोफार्मा भेजा गया है। इसमें पेयजल, सफाई व्यवस्था, कूड़ा निस्तारण, स्ट्रीट लाइट और टैक्स (कर) दरों में संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी और सुझाव मांगे गए हैं। महापौरों को साल 2023-24 से लेकर अब तक किए गए विकास कार्यों और बजट खर्च का पूरा ब्योरा देना होगा।

पीपीपी मॉडल और टैक्स कलेक्शन पर कड़े सवाल

इस बैठक में नगर निगमों की सक्रियता की भी अग्निपरीक्षा होगी। महापौरों को जवाब देना होगा कि-

- उनके निकाय में कार्यकारिणी समिति का गठन हुआ है या नहीं?
- क्या शहर की बुनियादी सेवाओं में सार्वजनिक निजी सहभागिता (PPP) मॉडल लागू है? यदि हां, तो इसके क्या परिणाम रहे?
- टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए?
- क्या टैक्स और फीस की दरों में संशोधन के लिए शासन से मंजूरी मिलने में देरी होती है?

लापरवाही पर होगी 'संशोधन अधिनियम 2025' के तहत कार्रवाई

अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि किसी नगर निगम ने यह महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी, तो संशोधन अधिनियम 2025 के कड़े प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, वित्त आयोग ने भी शहरों की आपदा प्रबंधन (डिजास्टर मैनेजमेंट) क्षमताओं को बढ़ाने और आय के नए स्थायी स्रोत तलाशने के लिए महापौरों से सुझाव और उनकी व्यावहारिक कठिनाइयों की रिपोर्ट मांगी है।

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