मॉय फर्स्ट राइड : पहली बार स्टीयरिंग थामने का डर और आत्मविश्वास की राह

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

जीवन में कुछ अनुभव ऐसे होते हैं, जो केवल कोई कौशल सीखने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हमारे व्यक्तित्व को भी नई दिशा दे जाते हैं। मेरे लिए कार चलाना सीखना ऐसा ही एक अनुभव रहा। आज जब मैं आत्मविश्वास के साथ लंबी दूरी तक कार चलाती हूं, तो उन दिनों की याद आ जाती है, जब स्टीयरिंग थामते ही दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं।

कार चलाना सीखने की प्रेरणा मुझे मेरे पति से मिली। उन्होंने कई बार कहा कि आज के समय में महिलाओं का आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। पहले मैं स्कूटी चलाती थी, लेकिन कार चलाने की कल्पना मात्र से घबरा जाती थी। मुझे लगता था कि इतने सारे कंट्रोल-क्लच, ब्रेक, एक्सीलेटर और गियर एक साथ संभालना मेरे बस की बात नहीं है। आखिरकार दो वर्ष पहले मैंने कार चलाना सीखने का निर्णय लिया।

शुरुआती दिन बेहद कठिन रहे। कभी गाड़ी बंद हो जाती, कभी गियर बदलने में गलती हो जाती और कभी ब्रेक अचानक लग जाता। हर छोटी भूल के साथ मन में डर और बढ़ जाता। अयोध्या के एयरपोर्ट रोड पर मैंने नियमित अभ्यास शुरू किया। रोज थोड़ा-थोड़ा आत्मविश्वास बढ़ता गया। लगभग बीस दिनों की मेहनत के बाद मैं अकेले सड़क पर कार लेकर निकलने लगी, लेकिन भीतर का डर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था।

मेरी असली परीक्षा तब हुई जब मुझे लखनऊ जाकर अपने पति को वापस लाना था। यह पहला अवसर था, जब मुझे अकेले लंबी दूरी तय करनी थी। घर से निकलते समय मन में अनगिनत आशंकाएं थीं। रास्ते भर हाथ स्टीयरिंग पर कसकर जमे रहे और नजरें सड़क से हटने का नाम नहीं ले रही थीं। सामान्यतः ढाई घंटे में पूरा होने वाला सफर मैंने लगभग चार घंटे में पूरा किया, लेकिन जब मैं सुरक्षित लखनऊ पहुंच गई, तो लगा मानो मैंने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली हो। उस दिन मुझे पहली बार एहसास हुआ कि मैं वास्तव में कार चला सकती हूं।

उस एक यात्रा ने मेरे भीतर का डर काफी हद तक खत्म कर दिया। धीरे-धीरे मैंने लंबी दूरी की यात्राएं शुरू कर दीं। लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों तक कार चलाकर जाना अब सामान्य बात हो गई। हाईवे पर ड्राइविंग का आनंद अलग ही होता है। खुली सड़क, तेज रफ्तार और आत्मनिर्भरता का एहसास मन को विशेष खुशी देता है।

आज जब मैं कार की चाबी हाथ में लेती हूं, तो उन शुरुआती दिनों की घबराहट याद आ जाती है। तब लगता है कि डर वास्तव में हमारे मन में होता है। यदि परिवार का साथ मिले और स्वयं पर विश्वास रखा जाए, तो कोई भी नई चुनौती कठिन नहीं रहती। कार चलाना सीखना मेरे लिए केवल एक कौशल हासिल करना नहीं था, बल्कि अपने भीतर छिपे आत्मविश्वास को पहचानने और उसे नई उड़ान देने का अनुभव था।


मोहुआ मुखर्जी, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज