कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया फ्लैक्ससीड मिल्क, कई बीमारियों से देगा छुटकारा
अलसी दूध के व्यावसायीकरण हेतु कुलपति ने दिए टिप्स
कुमारगंज, अयोध्या, अमृत विचार: अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय से सेहत और पोषण की दुनिया में एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में खाद्य एवं पोषण विभाग की पोस्ट ग्रेजुएट (स्नातकोत्तर) शोध छात्रा साक्षी पाण्डेय ने अलसी (Flaxseed) से एक नया और पूरी तरह से पौध-आधारित दूध (फ्लैक्ससीड मिल्क) तैयार किया है।
यह अनोखा आविष्कार उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो लैक्टोज इनटोलरेंस (दूध न पच पाना), मिल्क प्रोटीन एलर्जी या आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
कुलपति ने सराहा, दिए कमर्शियल उत्पादन के टिप्स
साक्षी ने यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सफलता अपनी शोध सलाहकार और सह-प्राध्यापक डॉ. ममता कुमारी के कुशल मार्गदर्शन में हासिल की है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने छात्रा के इस बेहतरीन नवाचार की जमकर सराहना की और इस अलसी के दूध को बाजार में व्यावसायिक (कमर्शियल) तौर पर उतारने के लिए कई उपयोगी टिप्स भी दिए।
स्वाद और सेहत में 'सोया मिल्क' से भी आगे
इस शोध के दौरान तैयार किए गए अलसी के दूध का कड़े वैज्ञानिक मानकों (9-पॉइंट हेडोनिक स्केल) पर संवेदी मूल्यांकन किया गया, जिसमें उपभोक्ताओं ने इसे बेहद पसंद किया। इसके बाद इस दूध के दो मूल्य-संवर्धित (Value-added) वेरिएंट विकसित किए गए:
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केसर-पिस्ता फ्लेवर
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चॉकलेट फ्लेवर
उपभोक्ताओं की पहली पसंद: जब बाजार में पहले से मौजूद 'सोया मिल्क' उत्पादों के साथ इसका मुकाबला कराया गया, तो 100 उपभोक्ताओं पर किए गए टेस्ट में केसर-पिस्ता फ्लैक्ससीड मिल्क को अपने बेहतरीन रंग, लाजवाब स्वाद, लाजवाब सुगंध और ओवरऑल क्वालिटी के लिए सबसे ज्यादा अंक मिले।
बिना किसी केमिकल और प्रिजर्वेटिव के तैयार
इस प्लांट-बेस्ड मिल्क की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह प्राकृतिक रखा गया है। इसे बनाने में किसी भी तरह के कृत्रिम (आर्टिफिशियल) फ्लेवर, परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव्स) या अन्य बाहरी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे भविष्य के लिए एक टिकाऊ, फंक्शनल और पोषण से भरपूर दूध का सबसे बेहतरीन विकल्प मान रहे हैं।
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