महिलाएं बाइक पर एक तरफ क्यों बैठती हैं 

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Published By Anjali Singh
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भारत में बाइक या स्कूटर पर पीछे बैठते समय महिलाओं को अक्सर दोनों पैर एक ही तरफ रखकर बैठते देखा जाता है। यह तरीका इतना सामान्य हो चुका है कि अधिकांश लोग इसके पीछे का कारण नहीं जानते। दिलचस्प बात यह है कि इसका संबंध किसी सुरक्षा नियम से नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सामाजिक परंपराओं से है। जानकारों के अनुसार महिलाओं के साइड में बैठने की परंपरा की शुरुआत मध्यकालीन यूरोप में हुई थी। उस समय राजघरानों और उच्च वर्ग की महिलाएं लंबे और भारी वस्त्र पहनती थीं।

सामाजिक मान्यताओं के कारण उनके लिए पुरुषों की तरह घोड़े पर दोनों तरफ पैर रखकर बैठना उचित नहीं माना जाता था। इसलिए वे ‘साइड-सैडल’ शैली में घुड़सवारी करती थीं, जिसमें दोनों पैर एक ही ओर रहते थे। यह तरीका शालीनता और सम्मान का प्रतीक माना जाता था। 

ब्रिटिश शासन के दौरान यह परंपरा भारत और दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों में भी पहुंची। धीरे-धीरे स्थानीय समाज ने इसे अपनाया और जब मोटरसाइकिल तथा स्कूटर जैसे वाहन आम हुए, तो महिलाओं का साइड में बैठना एक सामान्य व्यवहार बन गया। हालांकि भारतीय इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जो बताते हैं कि महिलाएं दोनों तरफ पैर रखकर सवारी करने में सक्षम थीं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण हैं, जिन्होंने घोड़े पर पुरुषों की तरह बैठकर युद्ध लड़ा था। इससे स्पष्ट होता है कि साइड में बैठना आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभावों का परिणाम था।  

आज भी कई महिलाएं साड़ी या अन्य पारंपरिक परिधानों की सुविधा, पारिवारिक संस्कार और सामाजिक मान्यताओं के कारण इसी तरह बैठना पसंद करती हैं। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ दोनों तरफ पैर रखकर बैठने को अधिक संतुलित और सुरक्षित मानते हैं। यह परंपरा दिखाती है कि इतिहास और संस्कृति का असर हमारी रोजमर्रा की आदतों पर कितना गहरा होता है। कई बार सामान्य दिखने वाली परंपराओं के पीछे लंबा ऐतिहासिक सफर छिपा होता है।         

स्वाति अग्रवाल