टूटते तारों की बारिश जून बूटिड्स
इन दिनों आसमान में दुर्लभ जून बूटिड्स उल्का वर्षा देखी जा सकती है। उल्का वर्षा 22 जून से 2 जुलाई तक सक्रिय रहेगी। जून बूटिड्स उल्का वर्षा वर्ष की सबसे अनिश्चित और रहस्यमयी उल्का वर्षाओं में से एक मानी जाती है। अधिकांश वर्षों में यह बहुत कम सक्रिय रहती है, लेकिन कुछ वर्षों में अचानक सैकड़ों उल्काएं प्रति घंटे तक दिखाई देने लगती हैं। यही कारण है कि खगोलविद इसकी विशेष रुचि से निगरानी करते हैं।
उल्का वर्षा क्या है?
उल्का वर्षा एक खगोलीय घटना है, जिसमें आकाश में बड़ी संख्या में उल्काएं (मेट्योर्स) एक ही दिशा से निकलती हुई प्रतीत होती हैं। इन्हें सामान्य भाषा में ‘टूटते तारे’ भी कहा जाता है, यद्यपि इनका तारों से कोई संबंध नहीं होता। जब कोई धूमकेतु या क्षुद्रग्रह अपनी कक्षा में धूल, बर्फ और चट्टानों के सूक्ष्म कण छोड़ता है, तब पृथ्वी अपनी परिक्रमा के दौरान इन कणों के समूह से होकर गुजरती है। ये कण पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक वेग से प्रवेश करते हैं और वायु के साथ घर्षण के कारण गर्म होकर चमकने लगते हैं। इसी चमकती हुई रेखा को उल्का कहा जाता है। जब ऐसी अनेक उल्काएं एक निश्चित अवधि में दिखाई देती हैं, तो उसे उल्का वर्षा (मेट्योर शॉवर) कहा जाता है। उल्का वर्षा का नाम उस तारामंडल के नाम पर रखा जाता है, जहां से उल्काएं निकलती हुई प्रतीत होती हैं।
क्या है जून बूटिड्स
जून बूटिड्स एक विलक्षण उल्का वर्षा है। इस उल्का वर्षा का स्रोत धूमकेतु यानी कॉमेट 7पी/पोंस-विन्नेके है। यह एक आवर्ती (पीरियोडिक) धूमकेतु है, जो लगभग 6.37 वर्ष में सूर्य की परिक्रमा करता है। इसका नाम जून बूटिड्स क्यों है? इस उल्का वर्षा की उल्काएं आकाश में जिस दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं, वह बिंदु बूटीस तारामंडल में स्थित है। इसी कारण इसका नाम जून बूटिड्स पड़ा। हालांकि वास्तविकता में उल्काएं अंतरिक्ष के विभिन्न भागों से आती हैं, परंतु परिप्रेक्ष्य (पर्सपेक्टिव) के कारण वे एक ही बिंदु से निकलती हुई दिखाई देती हैं। इस उल्का वर्षा की सक्रिय अवधि 22 जून से 2 जुलाई 2026 तक रहेगी। यह अपने चरम (पीक) पर 27-28 जून 2026 की रात्रि को रहेगी। इसका सर्वश्रेष्ठ अवलोकन समय मध्यरात्रि के बाद प्रातः 2 बजे से सूर्योदय तक रहेगा। भारत में 27 और 28 जून की रात इसका अवलोकन किया जा सकता है।
कैसे हुई धूमकेतु की खोज
इस धूमकेतु की खोज 12 जून, 1819 को प्रसिद्ध फ्रांसीसी खगोलविद जीन लुईस पोंस ने की थी। पोंस उस समय यूरोप के सबसे सफल धूमकेतु-शोधकर्ताओं में गिने जाते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में 37 से अधिक धूमकेतुओं की खोज की थी, जो एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड माना जाता है। 1819 में खोजे जाने के बाद यह धूमकेतु कुछ समय तक देखा गया, लेकिन बाद में इसकी कक्षा का पर्याप्त निर्धारण न होने के कारण यह खो गया और कई दशकों तक दोबारा दिखाई नहीं पड़ा। लगभग 40 वर्ष बाद, 9 मार्च, 1858 को जर्मन खगोलविद फ़्रेडरिक ऑगस्ट थियोडोर विन्नेके ने इस धूमकेतु को पुनः खोजा। उन्होंने गणनाओं से यह सिद्ध किया कि यह वही धूमकेतु था, जिसे 1819 में पोंस ने देखा था। इसके बाद धूमकेतु का नाम दोनों खोजकर्ताओं के सम्मान में ‘पोंस-विन्नेके’ रखा गया। जीन सुईस पोंस की विशेष बात यह थी कि उन्होंने औपचारिक वैज्ञानिक शिक्षा बहुत कम प्राप्त की थी, फिर भी वे इतिहास के सबसे सफल धूमकेतु-खोजकर्ताओं में से एक बने। उनकी तीक्ष्ण अवलोकन क्षमता ने उन्हें खगोल विज्ञान में अमर बना दिया।
क्यों है यह विशेष
अधिकांश उल्का वर्षाएं अपेक्षाकृत स्थिर होती हैं। उदाहरण के लिए पर्सिड्स या जेमिनिड्स उल्का वर्षा हर वर्ष अच्छी संख्या में उल्काएं देती हैं, लेकिन जून बूटिड्स अलग है। सामान्य वर्षों में प्रति घंटे केवल 1-5 उल्काएं दिखाई देती हैं। असाधारण वर्षों में इसकी गतिविधि अचानक बढ़ी हुई भी दर्ज की गई है। जैसे साल 1927 में यह धूमकेतु पृथ्वी के काफी निकट से गुजरा था। उस समय इसके द्वारा छोड़े गए कणों ने अत्यधिक सक्रिय उल्का वर्षा उत्पन्न की थी। बाद के वर्षों में भी जून बूटिड्स उल्का वर्षा की तीव्रता में होने वाले उतार-चढ़ाव को इस धूमकेतु की धूल धाराओं से जोड़ा गया है। साल 1998 में लगभग 100 उल्काएँ प्रति घंटे देखी गईं। 2004 में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई। इसलिए खगोलविद हर वर्ष उत्सुकता से इसकी निगरानी करते हैं कि कहीं यह फिर से सक्रिय न हो जाए।
कैसी दिखाई देती हैं उल्काएं
जून बूटिड्स की उल्काएं सामान्यतः-
- अपेक्षाकृत धीमी गति वाली होती हैं।
- आकाश में लंबी चमकदार रेखाएँ बना सकती हैं।
- कभी-कभी कुछ सेकंड तक दिखाई देती हैं।
- फोटोग्राफी के लिए आकर्षक मानी जाती हैं।
इनकी औसत गति लगभग 18 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है, जो कई अन्य प्रसिद्ध उल्का वर्षाओं की तुलना में कम है।
जून बूटिड्स केवल एक सुंदर दृश्य नहीं है। इसके अध्ययन से वैज्ञानिकों को धूमकेतुओं की संरचना समझने में, सौरमंडल के विकास का अध्ययन करने में, अंतरिक्ष में धूल और मलबे के वितरण को जानने में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
-डॉ. इरफान ह्यूमन
