Bareilly News : कैदियों के हुनरमंद हाथों से गढ़ी जा रही न्याय की कुर्सियां

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
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मुरादाबाद-बदायूं जिला न्यायालयों से मिला नया ऑर्डर, 60 बंदी बना रहे जेल में फर्नीचर

दिग्विजय मिश्रा बरेली, अमृत विचार। कभी गुनाह के रास्ते पर चलने वाले कैदी सलाखों के पीछे गजब का हुनर दिखा रहे हैं। सेंट्रल जेल बरेली में कैदियों के हाथ की नक्काशी से ऐसा फर्नीचर तैयार हुआ है, जिसका इस्तेमाल न्यायालयों में होता दिखेगा। मुरादाबाद और बदायूं जिला अदालत से कुर्सी और बैंच सहित कई तरह का फर्नीचर बनाने का जेल प्रशासन को ऑर्डर मिला है। माल तैयार करने के लिए कैदी सुबह से शाम तक जेल में जान लगा रहे हैं।

केन्द्रीय कारागार बरेली का फर्नीचर निर्माण केंद्र इन दिनों न्यायालयों के लिए विशेष कुर्सियां तैयार करने में जुटा है। यहां 60 से अधिक कैदी सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक मेहनत कर उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर का निर्माण कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिन हाथों में कभी हथियार नजर आते थे, वे अब लकड़ी को तराशकर न्याय की कुर्सियां गढ़ रहे हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, हाल ही में मुरादाबाद और बदायूं जिला न्यायालयों से जजों के लिए कुर्सियां तैयार करने का ऑर्डर मिला है। इससे पहले लखनऊ, बलरामपुर, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर और पीलीभीत जिला न्यायालयों को भी कैदियों के हाथों से बनाई गई कुर्सियां भेजी जा चुकी हैं। गुणवत्ता और मजबूती के कारण इन उत्पादों की लगातार मांग बढ़ रही है। जेल की फर्नीचर इकाई में बंदियों को बढ़ई गिरी और फर्नीचर निर्माण का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे सजा पूरी होने के बाद वे जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक रोजगार कर सकें। कैदियों को इस काम के बदले जेल प्रशासन निर्धारित मजदूरी भी देता है। हाल ही में बंदियों की दिहाड़ी में वृद्धि भी की जा चुकी। कुशल कैदियों की मजदूरी 40 रुपये से बढ़ाकर 81 रुपये प्रतिदिन, अर्धकुशल की 30 से बढ़ाकर 60 और अकुशल श्रेणी की 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन की गई है। अफसरों का कहना है कि यह पहल केवल कैदियों को रोजगारपरक कौशल देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए आत्मविश्वास भी पैदा कर रही है। न्यायालयों तक पहुंच रही ये कुर्सियां सुधार और पुनर्वास की उस कहानी की गवाह बन रही हैं, जहां अपराध की राह छोड़ चुके हाथ अपरोक्ष रूप से न्याय की सेवा कर रहे हैं।

महाकुंभ में लगी थी जेल के फर्नीचरों की प्रदर्शनी
सेंट्रल जेल में कैदियो के हाथों से बनाए गए कुर्सियां समेत अन्य फर्नीचर का जलवा प्रयागराज में लगे महाकुंभ में भी दिखा था। वहां जेल प्रशासन की ओर से कैदियों के बनाए गए उत्कृष्ट फर्नीचर की प्रदर्शनी और बिक्री स्टॉल लगाए गए थे। इस जेल में बना फर्नीचर प्रदेश भर की अदालतों, सरकारी दफ्तरों व जेलों में उपयोग किया जा रहा है। स्वरोजगार से जुड़कर यहां के कैदी कमाई कर रहे हैं। बहराइच के भिनगा में वन विभाग के डिपो से जेल प्रशासन का करार है। वहां से शीशम की छह से आठ साल पुरानी लकड़ी थोक में मंगाई जाती है। जेल में आरा मशीन सहित अन्य संसाधन मौजूद हैं। यहां कैदी कुर्सी, मेज, सोफा, टेबल, चार तरह की रैक समेत विभिन्न प्रकार का ऑफिस फर्नीचर बनाते हैं।

कारागार में तेयार हो रहीं खास फोल्डिंग कुर्सी
वैसे तो कई तरह के फर्नीचर सेंट्रल जेल में बनाए जाते हैं, पर यहां की फोल्डिंग चेयर खासी लोकप्रिय है। इस तरह की चेयर सामान्य तौर पर बाजार में भी नहीं मिलती है। बनाने के लिए उपकरण भी जेल में ही तैयार किए गए हैं। यहां जजमेंट बॉक्स भी बनाया जाता है। इसमें जज अपनी जरूरी फाइलें रखकर लॉक लगा सकते हैं। बरेली कोर्ट व अन्य स्थानों पर समय-समय पर प्रदर्शनी लगाकर इन सामानों की बिक्री भी की जाती है।

मुरादाबाद और बदायूं जिला न्यायालयों से कुर्सियां और बेंच बनाने के आर्डर मिले हैं। जिसे कैदी लगातार मेहनत कर तैयार कर रहे हैं। फर्नीचर तैयार करने के लिए 60 कैदी काम करते हैं। इससे पहले लखनऊ, बलरामपुर, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर और पीलीभीत जिला न्यायालयों में कुर्सियां भेजी जा चुकी हैं। -नीरज कुमार, जेलर सेंट्रल जेल।

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