Bareilly : एक हफ्ते में चमकाएं नाले, वरना नपेंगे जेई व सफाई निरीक्षक

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Published By Pradeep Kumar
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 लापरवाही पर होगा सीधे एक्शन, समीक्षा बैठक में मेयर ने दिए निर्देश

बरेली, अमृत विचार। मानसून की आहट के बीच शहर को जलभराव की आफत से बचाने के लिए नगर निगम पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। बुधवार को महापौर डॉ. उमेश गौतम ने नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य, स्वास्थ्य एवं निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि एक हफ्ते के भीतर सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाए। लापरवाही पर जेई और सफाई निरीक्षकों पर गाज गिरेगी।

इस बार जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शहर के 219 नालों को दो अलग-अलग विभागों में बांटा गया है। स्वास्थ्य विभाग जहां 187 नालों की जिम्मेदारी संभाल रहा है, वहीं निर्माण विभाग के पास 32 नालों को साफ करने का जिम्मा है। मॉनीटरिंग के लिए 8 सफाई निरीक्षक और पांच जूनियर इंजीनियर मैदान में उतारे गए हैं। मेयर ने विभिन्न जोन के जूनियर इंजीनियरों और सफाई निरीक्षकों से क्षेत्रवार स्थिति की जानकारी ली और अधूरे कार्यों पर जवाब-तलब किया। इस दौरान सामने आया कि अब तक लगभग 50 फीसदी नालों से गाद निकाली जा चुकी है। शेष कार्य को युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए। मेयर ने कहा कि अगले सप्ताह वे खुद नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता के साथ औचक निरीक्षण पर निकलेंगे। इसके साथ ही नालों को दोबारा चोक होने से बचाने के लिए कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक या निर्माण मलबा फेंकने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर चालान काटने के निर्देश दिए गए हैं। डलावघरों पर अत्यधिक कचरा जमा न होने देने और नालों के आसपास से सभी तरह के अवरोध व ट्रंक लाइनों को तुरंत हटाने की कार्ययोजना पर भी मुहर लगाई गई है।

जनता भी निभाए जिम्मेदारी, न बनाएं नालों को डस्टबिन
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने कहा कि जलभराव की समस्या सिर्फ सरकारी प्रयासों से खत्म नहीं हो सकती। कहा कि अक्सर देखा जाता है कि नगर निगम की ओर से सफाई किए जाने के कुछ ही घंटों बाद लोग घरों का कचरा, सिंगल-यूज प्लास्टिक और थर्माकोल सीधे नालों में फेंक देते हैं। यह लापरवाही पानी के बहाव को रोक देती है। हमें नागरिक होने का फर्ज निभाना होगा।

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